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भोले बाबा को भक्त का केवल दिल और समर्पण चाहिएः पंडित प्रदीप मिश्रा

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भोले बाबा को भक्त का केवल दिल और समर्पण चाहिएः पंडित प्रदीप मिश्रा


जयपुर, 22 मार्च (हि.स.)। जयपुर परिवार सेवा ट्रस्ट के बैनर तले मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड पर चल रही श्री शिव पुराण कथा के तीसरेे दिन रविवार को पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महिमा के प्रसंगों व भजनों से वातावरण को शिवमय बना दिया। इस दौरान देश के विभिन्न स्थानों से आए भक्त ओ शंभू तेरे बिना क्या जीना...अंत समय तुम्हें आना पड़ेगा और वचन दिया तो निभाना पड़ेगा...जैसे भजनों पर झुूमते-नाचते व भोले बाबा की भक्ति में मग्न दिखाई दिए।

इस अवसर पर कथा सुनाते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा सिहोर वाले ने कहा कि शिव महापुराण कहता है मेरे भोले बाबा का ना सोना चाहिए,ना ही चांदी और ना ही संसार का कोई वैभव। बाबा को तो केवल दिल व समर्पण चाहिए। इसलिए सच्चे मन से स्मरण करने पर भोले बाबा अवश्य ही प्रसन्न हो जाते है। उन्होंने यह भी कहा कि धन देकर व्यक्ति जल्दी दर्शन कर सकता है और कोई भी वीआईपी ट्रीटमेंट अर्थात सांसारिक भोग सामग्री को प्राप्त कर सकते हो लेकिन धन से तुम अपनी सांस नहीं बढ़ा सकते हो, उसी तरह तुम परमात्मा से नहीं मिल सकते है।

पं.मिश्रा ने आगे कहा कि भोले बाबा की भक्ति के लिए ना उम्र देखी जाती है और ना ही समय। जब भी तुम्हारा मन या चित्त लग जाए तभी भोले बाबा की आराधना शुरू कर दो, यानि जब भी 24 घंटे में जब भी समय मिले, उसी समय भोले बाबा की आराधना और स्मरण शुरू कर देना चाहिए। कारण है कि मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ है, भगवान शिव की आराधना के लिए कोई विशेष समय नहीं होता. जब चाहो, तब शिव का स्मरण करो, क्योंकि शिव सदैव हृदय में शांत रूप से विराजते हैं।

शिवलिंग की बारे में बताते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शिवलिंग का मतलब है भोले बाबा की ज्योति। यानि शिवलिंग शिव और शक्ति (ऊर्जा) का प्रतीक है, जो महादेव के निराकार स्वरूप को दर्शाता है। वे बताते हैं कि घर में अंगूठे के पोर बराबर छोटा शिवलिंग रखना चाहिए, जिससे कोई बड़ा रोग न हो। शिवलिंग की पूजा संघर्ष और साधना का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मकता लाता है। शिवलिंग की पूजा केवल मंदिर की रस्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सरल और सच्ची राह मानते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जयपुर में लाखों लोग रहते है,लेकिन कथा सुनने का सौभाग्य भाग्यशाली लोगों को मिलता है। मन की शांति व सुख तुम्हें दुनिया में कहीं भी मिलेगा,वह तुम्हें भोले बाबा की चरण में आने से ही मिलेगा। हमारे भोले बाबा भाग्य बताते नहीं है बल्कि बनाते है। उन्होंने यह भी बताया कि षिव पर चढ़ाए जल ग्रहण करने से कायिक,वाचिक व मानसिक रूपी 3 पाप नाश हो जाते है। इस मौके पर अवधेशाचार्य महाराज सहित लाखों की संख्या में श्रद्धालु मौजद रहे।

इस दौरान मंच से भुसावर व जयपुर सहित अन्य स्थानों से आए भक्तों के आए पत्रों में लिखें अनुभवों को मंच के माध्यम से साझा करते हुए कथावाचक मिश्रा ने कहा कि कथा का नियमित श्रवण करने और एक लोटा जल चढ़ाने से किसी ने परीक्षा पास कर ली और किसी की सरकारी नौकरी लग गई तो किसी को भयावह बीमारी से मुक्ति मिल गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश