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हजार साल पुराने शिव मठ मंदिर के संरक्षण को प्राथमिकता देगी सरकार

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हजार साल पुराने शिव मठ मंदिर के संरक्षण को प्राथमिकता देगी सरकार


जयपुर, 05 मार्च (हि.स.)। उप मुख्यमंत्री एवं कला, साहित्य, संस्कृति तथा पुरातत्व मंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि कोटा जिले के चंद्रेसल स्थित शिव मठ मंदिर लगभग 10वीं-11वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर है और राज्य सरकार इसके संरक्षण कार्य को शीघ्र प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएगी।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक कल्पना देवी द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने बताया कि पूर्व में इस मंदिर के शिखर के संरक्षण का कार्य इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि उसी प्रकार का उपयुक्त पत्थर उपलब्ध नहीं हो सका था। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण और विकास का कार्य विशेषज्ञों की देखरेख में अत्यंत सावधानी और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से कराया जाएगा, ताकि इसकी मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप सुरक्षित रह सके।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि शिव मठ मंदिर चंद्रेसल को पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने वर्ष 2008 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था। इसके बाद यहां सभा मंडप के जीर्णोद्धार, फर्श निर्माण, बलुआ पत्थर की फर्श बिछाने, चूने के पलस्तर, शौचालय सुविधा, कूड़ादान, पथ निर्माण, आधार संरक्षण तथा पत्थर की बैठने की बेंच जैसी कई सुविधाएं विकसित की गईं।

इससे पहले विधायक कल्पना देवी के मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया कुमारी ने बताया कि लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में कला और पर्यटन की दृष्टि से स्मारकों या सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का अलग से कोई सर्वेक्षण नहीं कराया गया है। हालांकि विभाग ने चट्टानों पर बने प्राचीन शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध अलानियां क्षेत्र, शिव मठ मंदिर चंद्रेसल तथा मानस गांव के मंदिर समूह को संरक्षित स्मारक घोषित किया हुआ है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुरातात्विक महत्व के चंद्रेसल मठ की छतरियों के जीर्णोद्धार या मरम्मत के लिए फिलहाल कोई नई कार्य योजना विचाराधीन नहीं है। विभाग में उपलब्ध बजट और प्राथमिकता के आधार पर ही ऐसे कार्यों का निर्णय लिया जाता है।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान शिव मठ मंदिर चंद्रेसल के संरक्षण और विकास के लिए विभाग द्वारा लगभग एक करोड़ 54 लाख रुपये के कार्य करवाए गए थे। इसका विस्तृत विवरण भी सदन के पटल पर रखा गया।

करीब एक हजार वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण को लेकर सरकार की प्राथमिकता सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों और इतिहास प्रेमियों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह प्राचीन धरोहर और अधिक सुरक्षित तथा विकसित रूप में दिखाई देगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित