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अरणी मंथन से शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में प्रज्वलित हुई अग्नि

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अरणी मंथन से शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में प्रज्वलित हुई अग्नि


अरणी मंथन से शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में प्रज्वलित हुई अग्नि


अजमेर, 09 मार्च (हि.स.)। तीर्थराज पुष्कर की तलहटी में चल रहे 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को अरणी मंथन से प्रधान कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। इसके साथ ही महायज्ञ के तहत मंगलवार से सभी हवन कुंडों में यज्ञाचार्यों के निर्देशन में आहुतियां देने का क्रम शुरू होगा।

महायज्ञ स्थल पर इस अवसर पर मां गायत्री के तीन स्वरूपों, सप्तऋषियों तथा आदि शंकराचार्य की प्रतिमा की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह अनुष्ठान महायज्ञ के प्रमुख सूत्रधार स्वामी प्रखर महाराज तथा महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर विशोकानंद महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में कानपुर के तिलकराज शर्मा उपस्थित रहे। इस दौरान लगभग 200 यजमान दंपतियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ वेदी पर देवी-देवताओं का आह्वान कर अनुष्ठान में भाग लिया।

महायज्ञ स्थल पर नव निर्मित छह पाठशालाओं में सोमवार से करीब 2000 विप्र बटुकों ने मां गायत्री के मंत्र जाप का अनुष्ठान भी प्रारंभ कर दिया। ये साधक प्रतिदिन लगभग 60 लाख से अधिक गायत्री मंत्रों का जाप करेंगे। शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ आयोजन समिति के मुख्य प्रवक्ता अशोक जोशी ने बताया कि यह महायज्ञ आतंकवाद के खात्मे, विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना के साथ आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महायज्ञ में आहुतियों और मंत्र जाप का क्रम 19 अप्रैल को होने वाली पूर्णाहुति तक जारी रहेगा।

उन्होंने बताया कि महायज्ञ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आगमन भी शुरू हो गया है और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई है। उल्लेखनीय है कि 43 दिवसीय इस शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का शुभारंभ रविवार को भव्य कलश और शोभायात्रा के साथ हुआ था। प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट और विप्र फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महायज्ञ में कुल 27 करोड़ गायत्री मंत्रों के जाप का संकल्प किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित