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डीएलसी दरों में भारी बढ़ोतरी से रियल एस्टेट पर पड़ेगी मार: केड़ाई राजस्थान

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डीएलसी दरों में भारी बढ़ोतरी से रियल एस्टेट पर पड़ेगी मार: केड़ाई राजस्थान


जयपुर, 10 जुलाई (हि.स.)। राज्य सरकार की ओर से डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में 40 प्रतिशत तक प्रस्तावित वृद्धि पर केड़ाई राजस्थान ने आपत्ति जताते हुए इसे अव्यावहारिक और जनहित के विपरीत बताया है। संगठन ने सरकार से वास्तविक बाजार मूल्य के विस्तृत सर्वे और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही नई दरें लागू करने की मांग की है।

केड़ाई राजस्थान के चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा कि डीएलसी दरों का निर्धारण परंपरागत रूप से जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा क्षेत्रवार बाजार मूल्य के अध्ययन के आधार पर किया जाता है। ऐसे में बिना विस्तृत सर्वे के एक समान वृद्धि प्राकृतिक न्याय और स्थापित प्रक्रिया के विपरीत है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में डीएलसी दरों में 10 प्रतिशत तथा अक्टूबर 2025 में सड़क की चौड़ाई के आधार पर 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा चुकी है। वहीं निर्माण दरों में भी करीब 50 प्रतिशत वृद्धि होने से स्टांप ड्यूटी का भार पहले ही बढ़ चुका है।

उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और इससे 381 से अधिक उद्योग जुड़े हैं। ऐसे में डीएलसी दरों में भारी वृद्धि से रियल एस्टेट बाजार में मंदी, निवेश में कमी और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही राज्य सरकार के राजस्व लक्ष्य पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में स्टांप एवं पंजीयन शुल्क से सरकार को करीब 10,542 करोड़ रुपए का राजस्व मिला, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए 15,000 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है।

संगठन के अध्यक्ष रविन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि डीएलसी दरों में वृद्धि का सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है, क्योंकि कई कर और शुल्क इन्हीं दरों के आधार पर तय होते हैं। महासचिव आशीष अग्रवाल ने कहा कि पूर्व में डीएलसी निर्धारण से पहले जनप्रतिनिधियों और संबंधित संगठनों से सुझाव लिए जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।

कार्यकारी अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा कि एक ओर सरकार 'राइजिंग राजस्थान' के जरिए निवेश आकर्षित करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर डीएलसी दरों में वृद्धि निवेश लागत बढ़ा सकती है। वाइस चेयरमैन राजेन्द्र सिंह पचार ने राजस्थान में स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक बताते हुए संशोधन की मांग की।

प्रवक्ता मदन यादव ने कहा कि प्रस्तावित वृद्धि से मकान खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जबकि कोषाध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल ने सरकार से मांग की कि नई दरें लागू करने से पहले सभी क्षेत्रों का वास्तविक बाजार मूल्य का सर्वे कराया जाए तथा जनप्रतिनिधियों और संबंधित संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए। संगठन ने यह भी कहा कि डीएलसी दरों में वृद्धि का असर शहरी सेवा शिविरों के तहत दिए जाने वाले पट्टों पर भी पड़ेगा और आमजन को अधिक शुल्क चुकाना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश