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वंचित जिलों में सर्वे के बाद केंद्रीय सहकारी बैंक स्थापित करने का आश्वासन

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वंचित जिलों में सर्वे के बाद केंद्रीय सहकारी बैंक स्थापित करने का आश्वासन


जयपुर, 09 मार्च (हि.स.)। सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के जिन जिलों में केंद्रीय सहकारी बैंक नहीं हैं, वहां सर्वे कर उनकी सक्षमता के आधार पर नए केंद्रीय सहकारी बैंक स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। इसके साथ ही केंद्रीय सहकारी बैंकों के उपनियमों में संशोधन कर उनमें बीमा व्यवसाय शुरू करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक चंद्रभान सिंह चौहान द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के उत्तर में राज्य मंत्री ने बताया कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों और केंद्रीय सहकारी बैंकों की प्रकृति व भूमिका अलग-अलग होती है। ग्राम सेवा सहकारी समितियां सामान्यत: छोटे स्तर की संस्थाएं होती हैं, जो गांव स्तर पर किसानों को ऋण, खाद, बीज और भंडारण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इन समितियों के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए सरकार सहायता और नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराती है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय सहकारी बैंक जिला स्तर पर कार्य करते हैं और पैक्स सहित अन्य संस्थाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हैं। इन बैंकों के पास स्वयं की पूंजी और आय के स्रोत होते हैं, इसलिए भूमि आवंटन नीति के तहत इन्हें नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान नहीं है। हालांकि, यदि इस संबंध में प्रस्ताव प्राप्त होता है तो भूमि आवंटन के विषय में विचार किया जा सकता है।

राज्य मंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि राज्य के 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की 304 शाखाएं वर्तमान में किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं। इन शाखाओं के कार्यक्षेत्र में कुल 29 हजार 639 गांव आते हैं, जिसका विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा।

उन्होंने यह भी बताया कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से लाइसेंस प्राप्त बैंक हैं और वाणिज्यिक संस्थानों की तरह कार्य करते हैं। इनके संचालन का खर्च स्वयं के लाभ और कोष से वहन किया जाता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इन शाखाओं को ग्राम सेवा सहकारी समितियों की तरह नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।

सहकारिता राज्य मंत्री ने बताया कि वित्तीय एवं बैंकिंग सेवा कियोस्क स्थापित करने में उच्च पूंजीगत और परिचालन लागत आती है, इसलिए सहकारी बैंकों की शाखाओं में ऐसे कियोस्क खोलने का प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। हालांकि, पैक्स के माध्यम से सदस्यों को नकद जमा, नकद निकासी, मिनी स्टेटमेंट और बकाया राशि की जानकारी जैसी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित