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युवा सशक्तिकरण पर राज्य सरकार का फोकस, रोजगार से आत्मनिर्भरता तक बढ़ रहे कदम

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युवा सशक्तिकरण पर राज्य सरकार का फोकस, रोजगार से आत्मनिर्भरता तक बढ़ रहे कदम


जयपुर, 12 अप्रैल (हि.स.)। किसी भी समाज और राष्ट्र की मजबूती उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करती है और इसी सोच के साथ राजस्थान सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में युवा नीति, कौशल नीति और रोजगार नीति लागू कर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल की गई है।

राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार सृजक बनाना है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत युवाओं को 10 लाख रुपए तक का ऋण 100 प्रतिशत ब्याज अनुदान और मार्जिन मनी सहायता के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के लिए 1000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में वाइब्रेंट कार्यक्रम संचालित किया जाएगा।

रोजगार के क्षेत्र में भी सरकार ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पिछले सवा दो वर्षों में 1 लाख 25 हजार से अधिक नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, जबकि 1 लाख 35 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। आगामी वर्ष में 1 लाख 25 हजार नई भर्तियों की घोषणा भी की गई है। निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए आयोजित राइजिंग राजस्थान ग्लोबल समिट के माध्यम से निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई की गई है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर राजस्थान स्टेट टेस्टिंग एजेंसी के गठन की प्रक्रिया जारी है। ग्रामीण युवाओं को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अटल ज्ञान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

युवाओं के समग्र विकास के लिए शिक्षा, तकनीक और नशामुक्ति पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महाविद्यालयों में ड्रीम कार्यक्रम के तहत 50 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा, जबकि 400 विद्यालयों को सीएम-राइज स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही STEM शिक्षा को बढ़ावा देकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेष वर्गों के लिए भी योजनाएं संचालित हैं। पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि घुमंतू समुदायों के बच्चों के लिए ‘स्कूल ऑन व्हील्स’ जैसी पहल शुरू की जा रही है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए राज-सवेरा कार्यक्रम लागू किया गया है।

खेलों के क्षेत्र में भी राज्य सरकार सक्रिय है। विभिन्न जिलों में खेल स्टेडियमों का निर्माण और उन्नयन किया जा रहा है। महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय के विकास के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, वहीं खेलो राजस्थान यूथ गेम्स के आयोजन के लिए 50 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।

राज्य सरकार की इन बहुआयामी पहलों का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाना है, ताकि वे विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव