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राजस्थानी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत

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राजस्थानी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत


जयपुर, 13 मई (हि.स.)। राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के अध्यक्ष के.सी. मालू ने राजस्थानी भाषा को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत करते हुए इसे करोड़ों राजस्थानियों के लिए गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल राजस्थानी भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि संवैधानिक मान्यता के मार्ग को भी मजबूत करेगा।

जयपुर से जारी बयान में मालू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को सरकारी और निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने के लिए नीति बनाने तथा बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही न्यायालय ने इस संबंध में 30 सितम्बर तक अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश और विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों में खुशी और उत्साह का माहौल है। यह निर्णय मायड़ भाषा प्रेमियों के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मुहिम को नई मजबूती प्रदान करेगा।

मालू ने कहा कि राजस्थानी भाषा मान्यता समिति इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सर्वोच्च न्यायालय, संबंधित खंडपीठ और दोनों न्यायमूर्तियों के प्रति आभार व्यक्त करती है। उन्होंने इस मामले में एसएलपी दायर करने वाले पदम मेहता और प्रो. कल्याण सिंह शेखावत के प्रयासों की भी सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।उ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने राजस्थान की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है। इससे राजस्थानी भाषा को कानूनी समर्थन मिलने के साथ संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को भी नैतिक बल मिला है।

के.सी. मालू ने कहा कि इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों की नई पीढ़ी पर भी पड़ेगा। इससे राजस्थानी भाषा, साहित्य, लोककला, संगीत और संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा तथा वैश्विक स्तर पर राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत बनेगी।उ उन्होंने कहा कि अब अभिभावकों और विद्यार्थियों में राजस्थानी भाषा के अध्ययन को लेकर सकारात्मक सोच विकसित होगी। जो विद्यार्थी अब तक राजस्थानी विषय लेने में संकोच करते थे, वे अब गर्व के साथ मायड़ भाषा में अध्ययन कर सकेंगे।

मालू ने विश्वास जताया कि भविष्य में राजस्थानी भाषा के विद्यार्थी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही भाषा आधारित रोजगार, शोध, साहित्य, मीडिया और सांस्कृतिक क्षेत्रों में नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित