कदमताल में दिखा अनुशासन, पुष्पवर्षा से हुआ स्वयंसेवकों का स्वागत
भीलवाड़ा, 20 अक्टूबर (हि.स.)।
विजयदशमी के पर्व पर मंगलवार को शाहपुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का विजयदशमी महोत्सव परंपरा, अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता के संदेश के साथ मनाया गया। नगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शाहपुरा के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों स्वयंसेवक एकत्र हुए। पारंपरिक गणवेश में सुसज्जित स्वयंसेवकों की कतारें, घोष की धुन, ध्वज प्रणाम और सामूहिक प्रार्थना ने आयोजन को विशिष्ट स्वरूप दिया। समारोह के बाद निकले पथ संचलन में स्वयंसेवकों की कदमताल और अनुशासित पंक्तियां आकर्षण का केंद्र रहीं। शहर के विभिन्न मार्गों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किया।
विजयदशमी महोत्सव की शुरुआत परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ हुई। कार्यक्रम में अतिथियों ने शस्त्र पूजन और घोष पूजन किया। इसके बाद ध्वजारोहण कर स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज को प्रणाम किया तथा संघ की प्रार्थना का सामूहिक वाचन किया। पूरे आयोजन में अनुशासन और निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप गतिविधियां संपन्न हुईं।
विजयदशमी अवसर पर संघ की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में संगठन की स्थापना के उद्देश्य, सामाजिक जीवन में स्वयंसेवकों की भूमिका और राष्ट्र के प्रति दायित्वों पर विचार रखे जाते हैं। शाहपुरा में आयोजित समारोह भी इसी क्रम में हुआ, जहां वक्ताओं ने सामाजिक एकता, पारिवारिक संस्कार और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया।
समारोह में मुख्य वक्ता संघ के वरिष्ठ प्रचारक देवाराम ने बौद्धिक संबोधन दिया। उन्होंने वर्तमान समय में हिंदू जागरण की महत्ता पर विचार रखते हुए संघ की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा, सामाजिक परिस्थितियों और बदलते वैश्विक परिवेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह तय करना जरूरी है कि नई पीढ़ी अपने आदर्श किसे मानती है और किन मूल्यों के आधार पर अपना भविष्य तैयार करती है। उनके अनुसार इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं को सही जानकारी, संस्कार और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण देना परिवार तथा समाज की जिम्मेदारी है।
देवाराम ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विभिन्न विचारधाराओं के बीच पैदा होने वाले भ्रम को दूर करने के लिए समाज में संवाद और वैचारिक स्पष्टता आवश्यक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की बात कही। उनके संबोधन का प्रमुख केंद्र सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक संगठन और नई पीढ़ी को पारिवारिक एवं राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना रहा।
वरिष्ठ प्रचारक ने संघ के पंच परिवर्तन के विचार को घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन अर्थात परिवार के भीतर संस्कार, संवाद और आपसी संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। संयुक्त परिवारों की उपयोगिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार केवल साथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच अनुभव, संस्कार और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण का माध्यम भी है।
उन्होंने सामाजिक जीवन में पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी को प्रोत्साहन, अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन जैसे विषयों का उल्लेख किया। उनके अनुसार समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत व्यक्ति और परिवार से होती है। जब परिवार में संवाद और संस्कार मजबूत होंगे, तब सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित होगी।
संबोधन के दौरान उन्होंने जातिगत अहंकार और सामाजिक विभाजन से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए समाज को एकजुट रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, परस्पर सम्मान और साझा सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से समाज को संगठित किया जा सकता है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और वैश्विक स्तर पर देश की भूमिका को लेकर भी अपने विचार व्यक्त किए।
महोत्सव के समापन के बाद स्वयंसेवकों का पथ संचलन निकाला गया। निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए स्वयंसेवकों की कतारें शहर के प्रमुख रास्तों से आगे बढ़ीं। घोष की धुन के साथ एक समान कदमताल करते स्वयंसेवकों का दृश्य लोगों का ध्यान खींचता रहा। मार्ग में जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किया। स्वागत के दौरान शहर में उत्सव जैसा वातावरण नजर आया।
पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों की अनुशासित चाल, एकरूपता और सामूहिक सहभागिता आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। विजयदशमी के अवसर पर निकले इस संचलन को देखने के लिए मार्गों पर नागरिक मौजूद रहे। पुष्पवर्षा के माध्यम से लोगों ने स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया।
नगर कार्यवाह घनश्याम सिंह ने पथ संचलन और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में स्वयंसेवकों को आवश्यक निर्देश दिए। संचलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शाहपुरा थाना प्रभारी लीलाधर मालवीय की अगुवाई में पुलिस जाप्ता तैनात रहा।
कार्यक्रम में विभाग कार्यवाह श्रवण ने भी संबोधित किया। नगर संघचालक कन्हैयालाल वर्मा ने समारोह में उपस्थित अतिथियों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन में वरिष्ठ स्वयंसेवक दुर्गालाल जांगिड़, शंकरलाल तोषनीवाल, देवेंद्र बेली, कन्हैयालाल धाकड़, विनोद सनाठ्य सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक मौजूद रहे।
शाहपुरा में आयोजित विजयदशमी महोत्सव में शस्त्र पूजन से लेकर सामूहिक प्रार्थना और पथ संचलन तक संघ की परंपराओं का निर्वहन किया गया। वहीं, बौद्धिक संबोधन में परिवार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण, स्वदेशी और सांस्कृतिक चेतना जैसे विषयों पर विचार रखे गए। शहर के विभिन्न मार्गों पर हुई पुष्पवर्षा ने आयोजन को सार्वजनिक सहभागिता का स्वरूप दिया। अनुशासित कदमताल के साथ संपन्न हुआ पथ संचलन विजयदशमी के अवसर पर शाहपुरा में दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

