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घोष की गूंज के बीच निकला पथ संचलन, कदम से कदम मिलाकर चले स्वयंसेवक

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घोष की गूंज के बीच निकला पथ संचलन, कदम से कदम मिलाकर चले स्वयंसेवक


घोष की गूंज के बीच निकला पथ संचलन, कदम से कदम मिलाकर चले स्वयंसेवक


जयपुर, 04 सितंबर (हि.स.)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऋषि गालव भाग की ओर से शुक्रवार को प्रांत घोष दिवस के तहत ‘नाद गोविंदम् 3.0’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत तोपखाना संघस्थान से घोष पथ संचलन के साथ हुई। घोष वाद्य यंत्रों की ओजपूर्ण स्वरलहरियों के बीच सैकड़ों स्वयंसेवक अनुशासित ढंग से कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े।

पथ संचलन पांचबत्ती और अजमेरी द्वार होते हुए रामनिवास बाग स्थित केंद्रीय संग्रहालय पहुंचा। यहां स्थिर वादन कार्यक्रम में 101 घोषवादकों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर 24 रचनाओं का वादन कर वातावरण को संगीतमय बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल जी ओक ने कहा कि संगीत मनुष्य के साथ-साथ प्रकृति की संवेदनाओं को भी प्रभावित करता है। भारतीय परंपरा में प्रसन्नता, उत्साह और साधना के अवसरों पर संगीत का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने कहा कि घोष की ओजपूर्ण स्वरलहरियां स्वयंसेवकों में अनुशासन, एकाग्रता और राष्ट्रभाव को जागृत करती हैं। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी और शंख को भी उन्होंने प्रेरणा के प्रतीक बताया।

अनिल ओक ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता कर्तव्य और धर्म पालन की प्रेरणा देती है। राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए साहस, संकल्प और कर्तव्यबोध आवश्यक है। उन्होंने वीर सावरकर के जीवन को राष्ट्र के प्रति त्याग और समर्पण का उदाहरण बताया तथा कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण, अनुशासन और समाज सेवा का प्रशिक्षण देती हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गायक, संगीत रचनाकार एवं मोहन वीणा वादक पंडित आलोक भट्ट ने कहा कि संगीत व्यक्ति में अनुशासन, एकाग्रता और संवेदनशीलता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ अधिकारी, स्वयंसेवक, मातृशक्ति और शहर के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित