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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सजेगा विचारों का महाकुंभ: नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित जुटेंगी दुनिया की नामचीन हस्तियां

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सजेगा विचारों का महाकुंभ: नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित जुटेंगी दुनिया की नामचीन हस्तियां


जयपुर, 11 अक्टूबर (हि.स.)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के ऐतिहासिक 20वें संस्करण के लिए वक्ताओं की पहली सूची जारी कर दी गई है। जनवरी 2027 में जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय समारोह में नोबेल पुरस्कार विजेताओं से लेकर प्रतिष्ठित लेखकों, वैज्ञानिकों, इतिहासकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और कलाकारों तक की भागीदारी रहेगी। वेदांता की प्रस्तुति में आयोजित होने वाला यह महोत्सव साहित्य और विचारों के दो दशकों के सफर का उत्सव मनाएगा।

पहली सूची में नोबेल पुरस्कार विजेता एस्थर डुफ्लो और ओल्गा टोकार्चुक के साथ डेम मीरा सयाल, लीज डूसे, जेम्स वुड, इसाबेला हम्माद, मार्कस डू सॉटॉय और जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसैट सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हैं। भारतीय वक्ताओं में सुधा मूर्ति, किरण मजूमदार-शॉ, प्रबल गुरुंग, जस्टिस संजय किशन कौल, इंदिरा जयसिंह, एसवाई कुरैशी, गीतांजलि श्री और अनामिका प्रमुख हैं।

फेस्टिवल में हिंदी, तमिल, मलयालम, असमिया, कोंकणी, कन्नड़, मराठी, भोजपुरी, सिंधी और मणिपुरी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की साहित्यिक परंपराओं को प्रमुखता दी जाएगी। संस्कृत के विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी, असमिया लेखक ध्रुवज्योति बोरा, मराठी नाटककार मकरंद साठे, कोंकणी लेखक दामोदर मौजो, मलयालम साहित्यकार पॉल जकारिया, कन्नड़ लेखक वसुधेंद्र, हिंदी-भोजपुरी के लेखक गौतम चौबे, गुजराती लेखक राम मोरी और तमिल-मलयालम के लेखक बी. जयमोहन भी वक्ताओं की सूची में शामिल हैं।

फेस्टिवल में विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास, तकनीक, कानून, लोकतंत्र, प्रवासन, पहचान और सामाजिक असमानता जैसे विषयों पर चर्चा होगी। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर मार्कस डू सॉटॉय और जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसैट विज्ञान से जुड़े विषयों पर विचार रखेंगे। वहीं, प्रदर्शन कला, लोकप्रिय संस्कृति और फैशन की दुनिया से डेम मीरा सयाल तथा प्रबल गुरुंग की भागीदारी आयोजन को विविधता प्रदान करेगी। जादूगर और किस्सागो ड्रमंड मनी-कुट्स भी फेस्टिवल का हिस्सा होंगे।

टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजॉय के. रॉय ने कहा कि दो दशक बाद भी फेस्टिवल की मूल भावना सभी के लिए खुला मंच उपलब्ध कराना है, जहां अलग-अलग विचार मिलें और नई बातचीत की शुरुआत हो। उन्होंने कहा कि यहां युवा दर्शकों को साहित्य, कला, संगीत, खानपान, डिजाइन और वास्तुकला से जुड़ी विरासत को जानने का अवसर मिलता है।

फेस्टिवल की सह-संस्थापक एवं सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि जयपुर में एक छोटे आयोजन के रूप में शुरू हुआ यह महोत्सव आज दुनिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में शामिल है। दो दशकों की यात्रा में इसने विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के लेखकों तथा साहित्यिक समुदायों को एक मंच पर जोड़ा है। आगामी संस्करण में भी समकालीन साहित्य से लेकर शास्त्रीय रचनाओं और सामाजिक-राजनीतिक विषयों तक विभिन्न पहलुओं पर संवाद होगा।

सह-निदेशक विलियम डैलरिम्पल ने कहा कि फेस्टिवल के 20 वर्ष पूरे होना उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसकी विशेषता स्थापित साहित्यकारों के साथ उभरते लेखकों, वैज्ञानिकों, इतिहासकारों और कलाकारों को एक मंच पर लाना है। आगामी संस्करण इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नए विचारों और संभावनाओं के लिए रास्ते खोलेगा।

फेस्टिवल का 20वां संस्करण जयपुर को इसके घर और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में रेखांकित करेगा। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन साहित्यिक संवाद के साथ राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक साहित्य समुदाय से जोड़ने का अवसर बनेगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में विचारों, कहानियों और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश