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अफ़ीम मुक्ति अभियान में आयुर्वेद विवि को मिली बड़ी सफलता

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अफ़ीम मुक्ति अभियान में आयुर्वेद विवि को मिली बड़ी सफलता


जोधपुर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल के मार्गदर्शन मे नशा मुक्ति और स्वास्थ्य अनुसंधान क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के अगदतंत्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) रितु कपूर के निर्देशन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. तुषार मिढा की टीम ने मिलकर एक विशेष मूल्यांकन टूल तैयार किया है, जिसका नाम आयुर्वेदिक ओपियम डी-एडिक्शन असेसमेंट टूल रखा गया है।

इस नवाचार को भारत सरकार के बौद्धिक संपदा अधिकार कार्यालय द्वारा कॉपीराइट मान्यता और प्रमाण पत्र भी प्रदान कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने इस सराहनीय कार्य और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि के लिए पूरी अनुसंधान टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह टूल विश्वविद्यालय की नशा मुक्ति इकाई से जुड़े चिकित्सकों के अथक प्रयासों का परिणाम है और भविष्य में अफ़ीम व्यसन से राहत दिलाने तथा वैज्ञानिक शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अफीम की समस्या से निपटने में मददगार

अगदतंत्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) रितु कपूर ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में अफ़ीम का व्यसन बहुतायत से फैल रहा है, जो कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यह टूल अफ़ीम की लत से पीडि़त रोगियों के सटीक मूल्यांकन, नशा छुड़वाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और भावी शोध कार्यों के लिए एक अत्यंत प्रभावकारी माध्यम सिद्ध होगा।भारत सरकार से आधिकारिक पहचान और कॉपीराइट मिल जाने के बाद अब इस टूल का उपयोग न केवल राजस्थान में, बल्कि पूरे भारत में अफ़ीम व्यसन मुक्ति केंद्रों और आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थानों द्वारा आधिकारिक रूप से किया जा सकेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश