home page

भगवद्गीता का कर्मयोग आधुनिक शोध के लिए भी प्रासंगिक — कुलगुरु प्रो. अग्रवाल

 | 
भगवद्गीता का कर्मयोग आधुनिक शोध के लिए भी प्रासंगिक — कुलगुरु प्रो. अग्रवाल




अजमेर, 5 मार्च(हि.स.)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में शोधार्थियों के लिए पाठ्यचर्या कार्यक्रम का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने इस अवसर पर पाठ्यचर्या का उदघाटन करते हुए कहा कि भगवद्गीता के कर्मयोग तथा देशज भारतीय मूल्य प्रणाली की वैश्विक प्रासंगिकता है।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि आज विश्व के प्रमुख शैक्षणिक और शोध संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि भगवद्गीता को लंबे समय तक केवल ‘तनाव प्रबंधन’ के ग्रंथ के रूप में सीमित कर दिया गया था, जबकि वास्तव में इसमें कर्मयोग के माध्यम से कर्तव्यनिष्ठा, नैतिकता और निर्णय क्षमता का गहन दर्शन निहित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शोध और शिक्षा जगत में इन मूल्यों की उपयोगिता निरंतर सिद्ध हो रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में “श्रीमद्भगवद्गीता एवं कर्मयोग” जैसे पाठ्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों की अभूतपूर्व रुचि देखी जा रही है, जहाँ सैकड़ों सीटें बहुत कम समय में भर जाती हैं। यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक और वैचारिक आधार भी तलाश रही है।

प्रो. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल धार्मिक या आध्यात्मिक विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन और कार्य की एक व्यावहारिक पद्धति प्रस्तुत करती है। कर्मयोग का सिद्धांत यह सिखाता है कि व्यक्ति दबावपूर्ण परिस्थितियों में भी धैर्य, स्पष्टता और उद्देश्य के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकता है।

कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. सुभाष चंद्र ने बताया कि शोधार्थियों के लिए आयोजित इस कोर्स वर्क कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों तथा समकालीन शोध दृष्टि से परिचित कराना है, जिससे वे अपने अनुसंधान कार्य को अधिक व्यापक और मूल्यनिष्ठ दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा सकें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष