रेफरल व्यवस्था मजबूत होगी, ऑनलाइन सेतु एप से पहले ही मिलेगी मरीज की जानकारी
जयपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश में मरीजों की रेफरल सेवाओं को और मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब ऑनलाइन सेतु एप लागू करेगा। आईएचएमएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार इस एप का उपयोग जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और एम्बुलेंस तक किया जाएगा। इसके जरिए मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किए जाने के बाद वहां पहले से ही इलाज की आवश्यक तैयारियां की जा सकेंगी।
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सेतु एप को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि एप में क्यूआर कोड की सुविधा होगी। इसके माध्यम से जिस संस्थान में मरीज को रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज के पहुंचने से पहले ही उसकी रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी। इससे चिकित्सकों को मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की तैयारी करने में मदद मिलेगी और रेफरल के बाद इलाज में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा।
बैठक में मातृ मृत्यु के मामलों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। प्रमुख शासन सचिव ने संबंधित चिकित्सकों के साथ उपचार व्यवस्था और निर्धारित प्रोटोकॉल पर चर्चा करते हुए आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थान स्तर पर संबंधित चिकित्सा प्रभारी और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, हाइपरटेंशन और वजन की नियमित जांच करें। आवश्यकता के अनुसार सोनोग्राफी भी कराई जाए। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस अभियान के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला की हर महीने स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के साथ उनकी सघन मॉनिटरिंग कर सुरक्षित प्रसव पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बैठक में बीकानेर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर, बूंदी, डूंगरपुर, अजमेर और श्रीगंगानगर में दर्ज मातृ मृत्यु के मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। संबंधित चिकित्सकों से उपचार व्यवस्था और प्रोटोकॉल की जानकारी ली गई तथा कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए।
अलवर के सीएमएचओ ने बताया कि जिले के निजी निशु हॉस्पिटल में अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा प्रसूता की डिलीवरी कराने के मामले में अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। अस्पताल संचालक चिकित्सक का आरएमसी पंजीकरण और नर्सिंगकर्मियों का आरएनसी पंजीकरण निरस्त करने के लिए भी संबंधित स्तर पर पत्र लिखा गया है।
प्रमुख शासन सचिव ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएसके के तहत स्कूलों में 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। बच्चों में जन्मजात विकृतियों और उनके विकास में बाधक बनने वाली बीमारियों सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की स्क्रीनिंग की जाएगी। आरबीएसके की टीमें प्रतिदिन स्कूलों में जाकर आवश्यक स्वास्थ्य जांच करेंगी। जांच के दौरान किसी बच्चे को उपचार की आवश्यकता पाए जाने पर रेफरल कार्ड बनाने, फॉलोअप करने और पीड़ित बच्चे का निःशुल्क उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी दैनिक रिपोर्ट निदेशालय स्तर पर भेजी जाएगी।
बारिश के मौसम को देखते हुए मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और स्क्रबटाइफस जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए सैंपलिंग और सर्विलॉन्स गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए गए। अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सकीय उपकरणों के सुरक्षित रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
अस्पतालों में मौजूद असुरक्षित या जर्जर कमरों का उपयोग नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. नरोत्तम शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

