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चांदपोल के रामचंद्र जी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ हुआ शस्त्र पूजन

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चांदपोल के रामचंद्र जी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ हुआ शस्त्र पूजन


जयपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। विजयादशमी पर मंगलवार को चांदपोल बाजार स्थित ठिकाना मंदिर श्री रामचंद्रजी में रियासतकालीन परंपरा के अनुसार आयुध-शस्त्र पूजन किया गया। शाम छह बजे महंत परिवार की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धनुष, बाण, तलवार, खड्ग, कटार, भाला, गदा, बंदूक और फरसा सहित विभिन्न प्राचीन शस्त्रों की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर में ठाकुरजी का राजसी दरबार सजाया गया। हवाई आतिशबाजी और बधाई उत्सव के बीच श्रद्धालुओं ने विजयादशमी का पर्व मनाया।

महंत नरेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि मंदिर में रियासतकाल से ही विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई जा रही है। उनके अनुसार, जयपुर में इस मंदिर में विशेष रूप से आयुध पूजन किया जाता है। प्राचीन शस्त्रों को सुरक्षित रखने के लिए मंदिर में अलग से शस्त्रागार भी बना हुआ है। दशहरे के दिन इन शस्त्रों को बाहर निकालकर विधि-विधान से पूजा जाता है।

मंदिर के शस्त्रागार में कई ऐतिहासिक और प्राचीन आयुध सुरक्षित हैं। इनमें करीब 10 किलो वजन और तीन फीट लंबा धनुष विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसे वर्ष 1882 में माजी साहब गुलाब कंवर ने भेंट किया था। इसके अलावा करीब आठ किलो वजन की दोधारी खड्ग और पांच किलो वजन की चांदी की तलवार भी शस्त्रागार की प्रमुख धरोहर हैं। चांदी की तलवार नरेश माधोसिंह ने भेंट की थी।

मंदिर में सूर्य चिह्न अंकित काठ की बंदूक भी मौजूद है, जिसे राजा भवानी सिंह ने भेंट किया था। इसके अलावा 10 फीट लंबे भाले, सिंहमुख गदा, लठ और चांदी की परत चढ़े अन्य शस्त्र भी सुरक्षित रखे गए हैं। इन सभी आयुधों को वर्ष में एक बार विजयादशमी के अवसर पर विशेष रूप से बाहर निकालकर पूजा जाता है।

विजयादशमी पर मंदिर में ठाकुरजी को रजवाड़ी पोशाक धारण करवाई गई और राजसी दरबार सजाया गया। इस अवसर पर ठाकुर जी के धारण करवाए जाने वाले शस्त्रों में चांदी से निर्मित धनुष, खड्ग, कटार और फरसा प्रमुख रहे। मंदिर परिसर में भक्त समाज की ओर से बधाई उत्सव भी मनाया गया। शस्त्र पूजन, पारंपरिक वेशभूषा और हवाई आतिशबाजी के बीच मंदिर में दशहरे की रौनक देखने को मिली।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश