कैदियों के हाथों बनी राखियां देंगी पर्यावरण बचाने का संदेश
जयपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। बदलते दौर में बाजार में राखियों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। रेशमी धागों और चाइनीज डिजाइन वाली राखियों के बीच इस बार इको फ्रेंडली राखियां और राखी ब्रेसलेट आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनमें गाय के गोबर से तैयार की गई राखियां खास चर्चा में हैं। इन राखियों को अलग-अलग डिजाइन के साथ राशि के अनुसार भी तैयार किया गया है।
इन राखियों की खास बात यह है कि इन्हें किसी बड़े कारीगर ने नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की नीमच जेल के कैदियों ने तैयार किया है। राखी निर्माता भीमराज शर्मा के अनुसार जेल में कैदियों को राखियां बनाने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उनके हाथों से गोबर से बनी आकर्षक राखियां तैयार की जाती हैं।
इन राखियों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जोड़ा गया है। कुछ राखियों में बीज डाले गए हैं। रक्षाबंधन के बाद राखी को मिट्टी में डालने पर इससे पौधा उगाया जा सकता है। इस तरह त्योहार के बाद राखी कचरे का हिस्सा बनने के बजाय प्रकृति संरक्षण में योगदान दे सकती है।
गोबर से कागज और अन्य उत्पाद तैयार करने के बाद उससे राखियां बनाई जा रही हैं। इनमें 12 राशियों के अनुसार राशि-रत्न वाले डिजाइन भी शामिल हैं। पारंपरिक नजरबट्टू का कॉन्सेप्ट भी राखियों में देखने को मिल रहा है।
युवाओं की पसंद को देखते हुए राखियों को ब्रेसलेट का रूप भी दिया गया है। इन्हें रक्षाबंधन के बाद भी पहना जा सकता है। निर्माताओं के अनुसार इन राखियों के जरिए स्थानीय संसाधनों के उपयोग, भारतीय परंपरा, स्वदेशी भावना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया गया है। खास बात यह भी है कि जिन हाथों को समाज अक्सर अपराध से जोड़कर देखता है, वही हाथ अब पर्यावरण और सामाजिक बदलाव का संदेश देने वाली राखियां तैयार कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

