राजस्थान के देवी धामों में नवरात्र की धूम, त्रिपुरा सुंदरी में पांच किलोमीटर लंबी चुनरी चढ़ाई
जयपुर, 11 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र रविवार को घट स्थापना के साथ शुरू हो गए। पहले दिन राजस्थान के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा की आराधना की। बांसवाड़ा के त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से लेकर बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर और सांभर के शाकंभरी माता मंदिर तक नवरात्र को लेकर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं।
बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा के निकट उमराई स्थित मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में नवरात्र के पहले दिन सुबह से श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। मंदिर में मां का पंचरंगी श्रृंगार किया गया और विशेष पूजा-अर्चना हुई। इंदौर से आए श्रद्धालुओं ने करीब पांच किलोमीटर लंबी चुनरी यात्रा निकालकर मां को चुनरी अर्पित की। मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की गई। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है। नवरात्र के दौरान यहां गरबा रास सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
बीकानेर जिले के देशनोक स्थित प्रसिद्ध करणी माता मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था की गई है। इस बार दर्शन के लिए पांच कतारें बनाई गई हैं। मंदिर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टेंट, पेयजल और चिकित्सा सहित अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। नवरात्र के दौरान देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। 18 अक्टूबर को मां करणी के जन्मोत्सव के अवसर पर भक्ति संगीत संध्या और 19 अक्टूबर को कवि सम्मेलन का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
जयपुर जिले की सांभर झील के मध्य स्थित मां शाकंभरी मंदिर में भी घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र महोत्सव शुरू हुआ। मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धालु पहुंचे। मां शाकंभरी को क्षेत्र में गहरी आस्था के साथ पूजा जाता है। नवरात्र के दौरान यहां दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
सीकर जिले के जीण माता मंदिर सहित प्रदेश के दूसरे प्रमुख देवी धामों में भी नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। जीण माता और राजेश्वरी मंदिरों में भक्तों की कतारें लगीं। जोधपुर के मेहरानगढ़ स्थित चामुंडा माता तथा बीकानेर के आशापुरा मंदिर में भी श्रद्धालु पहुंचे। करौली जिले के कैलादेवी मंदिर में 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले मेले को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। मेले में 250 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई है।
पुष्कर स्थित मणिबंध शक्तिपीठ और विराटनगर क्षेत्र के अंबिका मंदिर जैसे प्राचीन देवी स्थलों का भी विशेष धार्मिक महत्व है। पुष्कर के मणिबंध शक्तिपीठ को स्थानीय धार्मिक परंपरा में माता सती से जुड़ा शक्तिस्थल माना जाता है। विराटनगर के पापड़ी क्षेत्र स्थित अंबिका मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इन दोनों स्थलों पर आज के आयोजन और श्रद्धालुओं की संख्या के संबंध में स्वतंत्र, दिनांकित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां किसी विशेष कार्यक्रम या भीड़ का दावा नहीं किया गया है।
जयपुर के आमेर महल स्थित प्रसिद्ध शीला माता मंदिर में रविवार सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना की गई। दोपहर एक बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। नवरात्र के पहले दिन माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। 16 अक्टूबर को छठ मेले, 18 अक्टूबर की रात विशेष निशा पूजन और 19 अक्टूबर को पूर्णाहुति का कार्यक्रम निर्धारित है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrashekhar kuntal

