राजस्थान ने रचा नया कीर्तिमान: 50 हजार मेगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित
जयपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान रच दिया है। अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति का परिणाम है प्रदेश की कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 50 हजार मेगावाट से अधिक पहुंच गई है। गुजरात के बाद राजस्थान 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का स्तर छूने वाला देश का दूसरा राज्य हो गया है। नवीकरणीय ऊर्जा विशेषकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेशकों को निरन्तर प्रोत्साहित करने के परिणामस्वरूप राजस्थान ने यह उपलब्धि हासिल की है।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि 44,135 मेगावाट क्षमता के साथ राजस्थान अक्षय ऊर्जा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक सौर ऊर्जा में देश में प्रथम स्थान पर है और भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 27 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 लागू की और इसमें इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रकार के प्रोत्साहन एवं प्रावधान जोड़े गए। इस नीति में वर्ष-2030 तक 125 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिसके लिए सौर, पवन तथा हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण क्षमता के विकास पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि विगत करीब ढाई वर्ष में राजस्थान ने 26552 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। जिसमें सर्वाधिक 25 हजार मेगावाट से अधिक का योगदान सौर ऊर्जा का है।
राजस्थान में न केवल वृहद् सौर परियोजनाएं आकार ले रही हैं बल्कि विकेन्द्रित सौर ऊर्जा में भी प्रदेश लगातार अग्रणी बना हुआ है। पीएम कुसुम योजना में राज्य ने अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है। प्रदेश में पीएम कुसुम कंपोनेंट-ए एवं सी में लगभग 5 हजार मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इनसे कृषि क्षेत्र को दिन में विद्युत आपूर्ति का राज्य सरकार का संकल्प सार्थक हो रहा है। इसी प्रकार बीते ढ़ाई वर्ष में ही प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना में 2 लाख 90 हजार से अधिक रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं। इनसे 3 लाख से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। इससे भी 1128 मेगावाट की क्षमता हासिल की गई है।
प्रदेश के विद्युत निगम बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहे हैं। उत्पादन निगम एवं अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा 12,400 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता की परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। वहीं डिस्कॉम्स पायलट आधार पर 172 मेगावाट/688 ऑवर बैटरी भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में अग्रसर हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना में यूएलए मॉडल के अन्तर्गत 3 लाख घरों को रूफ टॉप सौर ऊर्जा से जोड़ने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
राज्य में 44,135 मेगावाट सौर ऊर्जा, 5,541 मेगावाट पवन ऊर्जा, 223 मेगावाट बायोमास एवं वेस्ट टू एनर्जी तथा 436 मेगावाट की हाइडल परियोजनाएं स्थापित हैं।
निवेश के अनुकूल वातावरण, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना, विशाल भूमि एवं सौर संसाधनों तथा स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता देने के सरकार के संकल्प का ही परिणाम है कि राजस्थान आज भारत के एनर्जी ट्रांजिशन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 50 हजार मेगावाट से अधिक की उपलब्धि राजस्थान की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा की मजबूत दिशा और सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

