(मंत्रिमंडल बैठक)...सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी
जयपुर, 21 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के औद्योगिक और तकनीकी विकास की दिशा में बड़ा निर्णय किया गया। बैठक में राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी–2025 को मंजूरी दी गई। यह प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर नीति है, जिसका उद्देश्य राजस्थान को सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग और संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में देश का प्रमुख गंतव्य बनाना है।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि यह नीति निवेशकों को आकर्षित कर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी और राज्य में उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी का प्रमुख उद्देश्य सेमीकंडक्टर और सेंसर्स के क्षेत्र में एंकर निवेश को आकर्षित करना, विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर पार्कों का विकास करना तथा फैबलेस डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है। इसके साथ ही नीति के माध्यम से प्रौद्योगिकी एवं कौशल संवर्धन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति के तहत सेमीकंडक्टर पार्कों में अक्षय ऊर्जा, जल दक्षता, पुनर्चक्रण और सर्कुलर इकोनॉमी आधारित पहलों के जरिए ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं को आकर्षक प्रोत्साहन दिए जाएंगे। नीति के अनुसार पात्र इकाइयों को सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, स्टाम्प शुल्क और भू-रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण, भारत सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत पूंजी सब्सिडी के 60 प्रतिशत के समतुल्य राज्य सरकार द्वारा पूंजी अनुदान, टर्म लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान की सुविधा दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, पर्यावरणीय परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति, कैप्टिव पावर प्लांट के लिए सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से पूर्ण छूट तथा राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के अंतर्गत प्रमाणित इकाइयों को सहमति शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का भी प्रावधान किया गया है। नीति में रोजगार सृजन प्रोत्साहन, स्किल एवं ट्रेनिंग इंसेंटिव, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इंसेंटिव और क्वालिटी सर्टिफिकेशन इंसेंटिव जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ने और राज्य में हाई-टेक इंडस्ट्री को मजबूत आधार देने में मदद मिलेगी।
राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी–2025 को प्रदेश को भविष्य की तकनीकों के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

