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उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कला मेले का किया शुभारम्भ

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उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कला मेले का किया शुभारम्भ


जयपुर, 17 मार्च (हि.स.)। उपमुख्यमंत्री तथा पर्यटन, कला-साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व मंत्री दीया कुमारी ने मंगलवार को जवाहर कला केंद्र स्थित शिल्पग्राम में राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित कला मेले का शुभारम्भ किया। यह कला मेला 21 मार्च तक चलेगा जिसमें आमजन का नि:शुल्क प्रवेश है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की घोषणा अनुसार इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को 19 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने राजस्थान दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजस्थान दिवस हमारी धरोहर और हमारी लोक संस्कृति का उत्सव है।

दिया कुमारी ने कहा कि राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत पर्यटन, कला- साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग की ओर से 14 मार्च से 19 मार्च तक लोक संस्कृति से परिपूर्ण विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत आज इस कला मेले का शुभारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मेले में प्रदेश के युवा कलाकारों की कलाकृतियों को बेहतरीन रूप से प्रदर्शित किया गया। आज की पीढ़ी हमारी कला एवं संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जाने और उन्हें सुरक्षित रखकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।

कला-साहित्य एवं संस्कृति विभाग की उप सचिव तथा जवाहर कला केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अनुराधा गोगिया ने बताया कि यह कला मेला जवाहर कला केंद्र में 17 मार्च से 21 मार्च तक चलने वाला यह मेला राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा क्यूरेटेड किया गया है। कला मेले में पारंपरिक और समसामयिक कला गतिविधियां आयोजित की जा रही है। जिसमें लगभग 100 से अधिक स्टॉल कलाकारों को आवंटित की गई हैं। जिनके माध्यम से विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस अवसर पर राजस्थान की लोक संस्कृति से ओतप्रोत और लोक नृत्य की भी भव्य प्रस्तुति की गई। जिसमें राजकी सपेरा एवं उनके समूह द्वारा कालबेलिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर राज की सपेरा एवं पूरण नाथ सपेरा की सुपुत्री ममता सपेरा मोरचंग वाद्य की मधुर प्रस्तुति दी। जिसमें राजस्थान के खरताल वाद्य यन्त्र का भी समायोजन रहा। इसी प्रकार रूप दास तेरह ताली पार्टी , पाली द्वारा तेरहताली नृत्य का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर श्रवण गेगावत द्वारा मासक वादन किया गया। इसके साथ ही कच्छी घोड़ी कलाकारों ने अपनी कला होने से सबको आकर्षित किया वही शहनाई नागौर की गूंज से वातावरण वातावरण में उत्सवी रंग घुल गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश