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राजस्थान में फैटी लिवर की व्यापक स्क्रीनिंग, 2025-26 में 2.61 करोड़ लोगों की जांच

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राजस्थान में फैटी लिवर की व्यापक स्क्रीनिंग, 2025-26 में 2.61 करोड़ लोगों की जांच


जयपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग को व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। गैर-संचारी रोग (एनसीडी) व्यवस्था के तहत फैटी लिवर की व्यवस्थित स्क्रीनिंग को शामिल किया गया है। ‘मिशन लिवर स्माइल’ के तहत बीमारी की समय पर पहचान, आवश्यक जांच और उपचार के लिए रेफरल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. शिव सरीन की अध्यक्षता में शनिवार को स्वास्थ्य भवन में बैठक हुई। इसमें फैटी लिवर की स्क्रीनिंग, उपचार, प्रशिक्षण और आगे की कार्ययोजना पर निर्णय लिए गए।

राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के सभी स्कूलों में ‘डब्ल्यू जोन’ बनाए जाएंगे। इनमें विद्यार्थियों के वजन, ऊंचाई और कमर की माप की जाएगी। इसे आरबीएसके और आरकेएसके कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा, जिससे बच्चों में मोटापे और मेटाबॉलिक जोखिम की समय पर पहचान हो सकेगी। ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से लिवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार की जाएगी, जिससे मरीजों की जानकारी और उपचार की स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। बायो बैंक की संभावना पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मोटापे को कम करने के लिए ईट राइट कैंपेन के तहत ‘मिशन ओवी लॉस’ चलाया जाएगा। इसके माध्यम से स्वस्थ खान-पान और बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा दिया जाएगा।

प्रदेश के सभी 63 जिला अस्पतालों में ‘लिवर स्माइल क्लीनिक’ संचालित किए जा रहे हैं। इनमें फैटी लिवर की जांच, आवश्यक परामर्श और जरूरत के अनुसार आगे के उपचार के लिए रेफरल की व्यवस्था है। ये क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को संचालित होते हैं।

राठौड़ ने बताया कि मिशन के तहत 150 नोडल अधिकारियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। करीब 10 हजार मेडिकल ऑफिसर और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे भी फैटी लिवर की स्क्रीनिंग को लेकर ऑनलाइन प्रशिक्षण जारी रहेगा।

वर्ष 2025-26 में 2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 31.02 लाख लोग संदिग्ध पाए गए। वर्ष 2026-27 में अब तक 1.32 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है, जिनमें 17.44 लाख संदिग्ध पाए गए हैं। वर्ष 2026-27 में पीएचसी और सीएचसी स्तर पर 26,54,556 लोगों की स्क्रीनिंग में 2,38,910 संदिग्ध मिले हैं। जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।

प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए जाने के बाद उपचार के लिए आगे नहीं पहुंचने वाले मरीजों के कारणों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके आधार पर मरीजों को जांच, परामर्श और उपचार से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रारंभिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। वहां एफआईबी-4 स्कोर के माध्यम से बीमारी की गंभीरता का आकलन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज में फाइब्रोस्कैन, बायोप्सी और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रेफरल की व्यवस्था है।

राठौड़ ने कहा कि फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन नियंत्रित रखना जरूरी है। मिशन का उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान के साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, आरजीएचएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल, खाद्य आयुक्त अविचल चतुर्वेदी, निदेशक जन स्वास्थ्य डॉ. रवि शर्मा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरजीएचएस डॉ. निधि पटेल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव