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राजस्थान में ईद पर दिखा विरोध और भाईचारे का अनोखा संगम, कई जगह प्रदर्शन तो कहीं फूलों से स्वागत

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राजस्थान में ईद पर दिखा विरोध और भाईचारे का अनोखा संगम, कई जगह प्रदर्शन तो कहीं फूलों से स्वागत


जयपुर, 21 मार्च (हि.स.)। राजस्थान में इस वर्ष ईद उल फितर का दिन सामान्य उत्सव से अलग, भावनाओं के एक जटिल और गहरे मिश्रण के रूप में सामने आया। जहां एक ओर मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा कर अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी गई, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर समाज के एक वर्ग में आक्रोश और शोक की भावना भी दिखाई दी।

राजधानी जयपुर में सुबह से ही ईद की हलचल थी, लेकिन इस बार माहौल में पारंपरिक उल्लास के साथ एक गंभीरता भी घुली हुई थी। आमेर और सुभाष चौक क्षेत्र में शिया समुदाय के लोग नमाज के बाद सड़कों पर उतर आए। महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने इस विरोध को और व्यापक स्वरूप दिया। हाथों में तख्तियां, बांहों पर काली पट्टियां और चेहरों पर आक्रोश जैसे दृश्य यह बता रहे थे कि यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनात्मक प्रतिक्रिया है। अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोगों ने अपनी नाराजगी जताई और इसे अन्याय के खिलाफ आवाज बताया।

जयपुर के सुभाष चौक स्थित जामा मस्जिद पर काले झंडे लगाए गए, जो इस बार ईद को शोक के प्रतीक के रूप में भी स्थापित कर रहे थे। कई लोगों ने इसे “खुशी का नहीं, बल्कि मातम का दिन” बताया।

यही स्वर अजमेर और सीकर सहित अन्य जिलों में भी सुनाई दिया, जहां शिया समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की। अजमेर के दौराई क्षेत्र में इमाम-ए-जुमा मौलाना सैय्यद तकी जाफर ने समाज की भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने इस बार ईद की खुशियों को मातम में बदल दिया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों नए कपड़े पहनने, मिठाइयां बनाने और जश्न मनाने से दूरी बनाए रखने का निर्णय किया है।

इसी बीच अजमेर दरगाह में ईद की रौनक अपने पारंपरिक स्वरूप में भी दिखाई दी। सुबह साढ़े चार बजे जन्नती दरवाजा खोला गया, जहां देशभर से आए जायरीन ने जियारत की। यहां का माहौल आध्यात्मिक आस्था और शांति की भावना से ओत-प्रोत था, जहां लोगों ने देश और दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी।

प्रदेश के अन्य हिस्सों जोधपुर, सीकर, उदयपुर, बांसवाड़ा और भरतपुर में भी ईद की नमाज अदा की गई। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास पुलिस और आरएएफ के जवान तैनात किए गए, ड्रोन से निगरानी रखी गई और कई स्थानों पर फ्लैग मार्च निकाले गए।

इन सबके बीच, राजस्थान ने एक बार फिर अपनी गंगा-जमुनी तहजीब की झलक भी पेश की। जयपुर में कई स्थानों पर हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने नमाजियों पर फूल बरसाए और गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित