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जीएसटी के प्रस्तावित बदलाव से ऐप आधारित राइड-हेलिंग मॉडल पर संकट

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जीएसटी के प्रस्तावित बदलाव से ऐप आधारित राइड-हेलिंग मॉडल पर संकट


जयपुर, 10 जुलाई (हि.स.)। जीएसटी कानून की धारा 9(5) के तहत सब्सक्रिप्शन आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित कर व्यवस्था ड्राइवरों की कमाई, यात्रियों की जेब और डिजिटल मोबिलिटी सेक्टर पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। यह दावा एस्या सेंटर की नई रिपोर्ट में किया गया है।

एस्या सेंटर की निदेशक मेघना बाल ने कहा कि ‘दक्षता और समानता में संतुलन: जीएसटी व्यवस्था के तहत भारत की टेक्नोलॉजी-आधारित परिवहन सेवाओं से मिले साक्ष्य’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट 13 शहरों के 1,044 ड्राइवरों और 1,059 यात्रियों के सर्वे पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, सब्सक्रिप्शन मॉडल में ड्राइवर प्लेटफॉर्म को निश्चित शुल्क देकर स्वयं किराया तय करते हैं, यात्रियों से सीधे भुगतान लेते हैं और पूरी कमाई अपने पास रखते हैं। ऐसे मॉडल पर धारा 9(5) के तहत जीएसटी लागू करना कानूनी और व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक 86 प्रतिशत ड्राइवर बुकिंग के लिए सब्सक्रिप्शन आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, जबकि 56 प्रतिशत का मानना है कि इससे उनकी आय में सुधार हुआ है। यदि प्रस्तावित जीएसटी लागू होता है तो 80 प्रतिशत ड्राइवरों ने कमाई घटने, करीब 60 प्रतिशत ने बुकिंग कम होने और 40 प्रतिशत ने ऑफ-प्लेटफॉर्म (बिना बिल) सवारी करने की आशंका जताई है।

यात्रियों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना जताई गई है। 68 प्रतिशत यात्रियों ने कहा कि यदि किराया सिर्फ 5 प्रतिशत भी बढ़ा तो वे ऐप आधारित ऑटो और कैब सेवाओं का उपयोग कम कर देंगे, जबकि लगभग आधे यात्री पारंपरिक टैक्सी या ऑटो का विकल्प चुन सकते हैं। वहीं करीब 90 प्रतिशत यात्रियों ने ऐप आधारित सेवाओं में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

मेघना बाल ने कहा कि डिजिटल मोबिलिटी के तेजी से बदलते स्वरूप के अनुरूप टैक्स व्यवस्था में स्पष्टता और संतुलन जरूरी है। वहीं ईवाई की टैक्स पार्टनर जयश्री पार्थसारथी ने कहा कि नए डिजिटल बिजनेस मॉडल के अनुरूप अप्रत्यक्ष कर नियमों को भी समय के साथ अपडेट करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में सरकार से सिफारिश की गई है कि धारा 9(5) के प्रावधान केवल उन प्लेटफॉर्म पर लागू किए जाएं, जो किराया तय करने और भुगतान संग्रह पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखते हों। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवर सत्यापन और यात्रा निगरानी जैसी कानूनी जिम्मेदारियों को टैक्स दायित्व का आधार नहीं बनाया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश