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दिवेर के शौर्य की गूंज के साथ सजी मेवाड़ की लोक संस्कृति, सतरंगी प्रस्तुतियों ने मोहा मन

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दिवेर के शौर्य की गूंज के साथ सजी मेवाड़ की लोक संस्कृति, सतरंगी प्रस्तुतियों ने मोहा मन


उदयपुर, 24 सितम्बर (हि.स.)। दिवेर विजय महोत्सव 2026 के अंतर्गत गुरुवार शाम प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में मेवाड़ के शौर्य, गौरव और सांस्कृतिक वैभव का मनोहारी संगम देखने को मिला। मेवाड़ी लोक परंपराओं के रंगों के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने वातावरण को सुरमयी बना दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना को कला के विविध रूपों में अभिव्यक्त किया।

चित्रकला कार्यशाला व सांस्कृतिक संध्या संयोजक संस्कार भारती उदयपुर के अध्यक्ष प्रो. रामसिंह भाटी ने बताया कि उत्तर क्षेत्र संस्कृति केंद्र पटियाला, प्रताप गौरव केंद्र उदयपुर एवं संस्कार भारती उदयपुर महानगर इकाई के चल रही राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला के अंतर्गत यह सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई।

कार्यक्रम का आरंभ गणेश वंदना से हुआ। भरतनाट्यम की एकल एवं सामूहिक प्रस्तुतियों ने मंगलमय वातावरण रचा, वहीं कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति ने शास्त्रीय नृत्य की लय और सौंदर्य को साकार किया। मीरा कन्या महाविद्यालय की छात्रा साफिया ने सितार वादन में देशभक्ति धुन प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया।

इसके बाद देवयानी मीणा ने भजन की प्रस्तुति दी, जबकि हार्दी व्यास ने पियानो वादन एवं गायन से सांगीतिक रंगों की अनूठी छटा बिखेरी। लोकनृत्य ने सभागार में मरुधरा की माटी की महक और लोकजीवन की उमंग भर दी। समूह गान में महाराणा प्रताप के शौर्य का गुणगान हुआ तो मेवाड़ की लोक प्रस्तुतियों की आत्मीयता से वातावरण को सराबोर कर दिया। अंत में शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

सांस्कृतिक संध्या में अतिथि के रूप में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान के पूर्व महामंत्री प्रो. ग्यारसीलाल, सामाजिक एवं मानविकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता प्रो. दिग्विजय भटनागर तथा उत्तर प्रदेश राज्य की ललित कला अकादमी के अध्यक्ष एवं बीएचयू के प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा उपस्थित रहे। प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा वही कलाकार हैं, जिनके बनाए भगवान श्रीराम की बाल स्वरूप मूर्ति के स्केच के आधार पर अयोध्या राम मंदिर में प्रतिष्ठित बाल स्वरूप की मूर्ति के निर्माण की दिशा में कार्य हुआ। इस अवसर पर संस्कार भारती के महानगर इकाई के महामंत्री मुकेश पंवार ने संस्कार भारती के विविध कार्यक्रमों की जानकारी दी। संचालन तन्नेसिंह सोढ़ा ने किया।

उल्लेखनीय है कि कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए 20 चित्रकार मेवाड़ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिदृश्य से रूबरू होकर अपनी अनुभूतियों को चित्रों में मूर्त रूप प्रदान कर रहे हैं। इसी क्रम में कलाकारों को मेवाड़ की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने के उद्देश्य से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उपरांत कलाकारों का अभिनंदन भी किया गया।

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केन्द्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि गुरुवार को पूर्व महाराणा राज सिंह की 397वीं जयन्ती पर उन्हें भी नमन किया गया। साथ ही उनके द्वारा मेवाड़ के विकास में किए गए चहुंमुखी योगदान को रेखांकित करते हुए जनमानस तक इसे पहुंचाने की आवश्यकता प्रतिपादित की गई। उन्होंने बताया कि दस दिवसीय दिवेर विजय महोत्सव का समापन 26 सितम्बर को होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत होंगे। कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा उपस्थित रहेंगे।

दिवेर विजय महोत्सव के तहत तैयार किए गए नुक्कड़ नाटक 'दिवेर का रणघोष' गुरुवार सायंकाल पानेरियों की मादड़ी की मयूरवन कॉलोनी स्थित नर्बदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में मंचित किया गया। शुक्रवार सायंकाल शिल्पग्राम के समीप स्थित सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी) के नवीन परिसर में देश भर से आए शिक्षकों और छात्रों के समक्ष इसका मंचन किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता