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बीमा प्रक्रिया का सरलीकरण : अब वारिसनामा और पारिवारिक सहमति से भी मिल सकेगी बीमा राशि

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बीमा प्रक्रिया का सरलीकरण : अब वारिसनामा और पारिवारिक सहमति से भी मिल सकेगी बीमा राशि


जयपुर, 28 मई (हि.स.)। राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा दावा प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब दिवंगत बीमित किसानों के लंबित फसल बीमा दावों का निस्तारण पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज होगा। कृषि विभाग ने इस संबंध में बीमा कंपनियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बदलते मौसम, ओलावृष्टि, चक्रवाती वर्षा तथा कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी फसल को नुकसान होने जैसी परिस्थितियों में किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। यह योजना किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक योजना के तहत बड़ी संख्या में ऐसे बीमा क्लेम लंबित पड़े थे, जिनमें बीमित किसान की मृत्यु हो चुकी थी। पुराने नियमों के अनुसार बीमा राशि प्राप्त करने के लिए परिवार को न्यायालय से उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य था। यह प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली होने के कारण कई किसान परिवार क्लेम प्रक्रिया में रुचि नहीं ले पा रहे थे।

नए निर्देशों के अनुसार यदि राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर बीमित किसान ने किसी पारिवारिक सदस्य को पहले से मनोनीत किया हुआ है, तो बीमा दावा राशि सीधे उसी सदस्य को भुगतान कर दी जाएगी। इसके अलावा जिन मामलों में मनोनयन उपलब्ध नहीं है, वहां भी अब प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। ऐसे मामलों में न्यायालय के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के अलावा तहसीलदार या पटवारी द्वारा जारी वारिसनामा अथवा परिवार के सभी सदस्यों की सहमति से अधिकृत किसी एक सदस्य को बीमा राशि दी जा सकेगी।

कृषि आयुक्त ने बताया कि जिन मामलों में परिवार के भीतर किसी प्रकार का विवाद नहीं है, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या वारिसनामा की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। यदि परिवार के सभी सदस्य 50 रुपये के नोटरी स्टाम्प पर शपथ पत्र देकर किसी एक सदस्य को बीमा राशि प्राप्त करने के लिए अधिकृत करते हैं, तो बीमा कंपनी उस सदस्य के बैंक खाते में सीधे भुगतान कर सकेगी।

फसल बीमा क्लेम के भुगतान के लिए अब सीमित और सरल दस्तावेजों को पर्याप्त माना गया है। इनमें मृत्यु प्रमाण पत्र, पारिवारिक सहमति शपथ पत्र, बैंक खाते की प्रति या रद्द चेक, आधार कार्ड की प्रति शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि इससे किसानों के परिवारों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और क्लेम प्रक्रिया तेज होगी। कृषि विभाग ने सभी अधिसूचित बीमा कंपनियों को निर्देशित किया है कि दिवंगत किसानों के लंबित दावों का प्राथमिकता और मानवीय संवेदनशीलता के साथ निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सके।

उल्लेखनीय है कि लंबे समय से बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्लेम सिर्फ दस्तावेजी जटिलताओं के कारण लंबित पड़े हुए थे।

नए निर्णय के बाद हजारों किसान परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार की इस पहल की कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने भी सराहना की है। माना जा रहा है कि इस फैसले से किसानों और उनके परिवारों को बड़ी प्रशासनिक राहत मिलेगी तथा फसल बीमा योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित