आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छह दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण षट्कर्म शुरू
जोधपुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविंद सहाय शुक्ल के मार्गदर्शन में आंगिक यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ नैचुरोपैथी एंड यौगिक साइंसेज में आयोजित छह दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण- षट्कर्म का सोमवार को शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला के प्रथम दिवस विद्यार्थियों को षट्कर्म की शुद्धि क्रियाओं का सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने के साथ उनका प्रायोगिक अभ्यास कराया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चन्द्रभान शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को षट्कर्म की विभिन्न योगिक शुद्धि क्रियाओं की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रायोगिक प्रशिक्षण से विद्यार्थी योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में वर्णित शुद्धि क्रियाओं की प्रक्रिया, उपयोगिता एवं आवश्यक सावधानियों को व्यवहारिक रूप से समझ सकेंगे, प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सुबह 7.30 बजे स्नातक अध्येताओं द्वारा सूर्य को अध्र्य प्रदान कर सूर्य नमस्कार के 12 मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया गया। इसके पश्चात नीम के दातून से दंतधावन एवं जिह्वा निर्लेखन की योगिक दिनचर्या का प्रायोगिक अभ्यास कराया गया। इसके बाद वमनधोती(कुन्जल क्रिया) कर्म का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया।
विद्यार्थियों को क्रिया की विधि, उद्देश्य, उपयोगिता तथा अभ्यास के दौरान आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। धौति कर्म विषय पर पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों को इसके सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्ष से भी अवगत कराया गया।
कार्यशाला के सह-प्रभारी डॉ. अजीत सिंह चारण एवं डॉ. कविता फोगाट ने विद्यार्थियों को विभिन्न योगिक क्रियाओं का प्रायोगिक अभ्यास करवाया तथा क्रियाओं की विधि एवं आवश्यक सावधानियों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया। इस अवसर पर संकाय सदस्य डॉ राकेश गुप्ता, डॉ आरती सूवालखा, डॉ. दीक्षा जैन सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और विभिन्न शुद्धि क्रियाओं का प्रायोगिक अभ्यास किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

