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महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाई

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महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाई


जयपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में बिल गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी जहां कांग्रेस और विपक्षी दलों पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस ने भी जवाबी रणनीति तैयार कर मैदान में उतरने का फैसला किया है।

भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन का बिगुल बजाते हुए कांग्रेस को महिला विरोधी करार दिया है। राजस्थान में भी भाजपा महिला मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। वहीं इसके जवाब में कांग्रेस ने प्रदेशभर में जनजागरण अभियान शुरू करने की घोषणा की है।

प्रदेश कांग्रेस महासचिव व प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि कांग्रेस पहले से ही 1 अप्रैल से ‘संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान चला रही है। अब महिला आरक्षण बिल को लेकर जन जागरण अभियान को भी इसमें शामिल किया गया है। यह अभियान आज से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी जिलों में चलाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत महिला कांग्रेस, एनएसयूआई, युवा कांग्रेस, सेवादल और जिला स्तर के संगठन सक्रिय भूमिका निभाएंगे। बूथ और वार्ड स्तर तक नुक्कड़ सभाएं और डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाकर महिलाओं और आम मतदाताओं को बिल से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी जाएगी।

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण बिल की आड़ में राजनीति कर रही है। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में बिल पारित हो चुका था और विपक्ष चाहता था कि इसे तुरंत लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे तीन वर्षों तक लंबित रखा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने की बात कही गई, लेकिन अब बिना जनगणना कराए परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष सारिका सिंह ने भाजपा के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश और प्रदेश की महिलाएं अब जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि जब 2023 में ही महिला आरक्षण बिल पारित हो गया था तो उसे 2026 तक लागू क्यों नहीं किया गया और 2024 के लोकसभा चुनाव में इसे लागू क्यों नहीं किया गया।

सारिका सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं और विपक्ष ने बिल के बहाने संभावित परिसीमन को रोकने का काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला अधिकारों की बात करने वाली भाजपा को अपने नेताओं से जुड़े विवादों पर भी जवाब देना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश