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किराए की गाड़ियों पर पुलिस का शिकंजा: अब हर किराएदार की होगी कड़ी जांच

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किराए की गाड़ियों पर पुलिस का शिकंजा: अब हर किराएदार की होगी कड़ी जांच


जयपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। राजधानी में बिना वैध वाणिज्यिक पंजीकरण और लाइसेंस के वाहन किराए पर देने तथा निजी वाहनों के गैर-कानूनी व्यावसायिक इस्तेमाल पर अब पुलिस सख्ती करेगी। किराए की गाड़ियों का आपराधिक और अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने की शिकायतों के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने वाहन किराए पर देने वालों के लिए कई कड़े नियम लागू किए हैं। अब वाहन किराए पर लेने वाले व्यक्ति के साथ उसके सह-यात्रियों की पहचान और यात्रा से जुड़ी जानकारी भी दर्ज करनी होगी।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट डॉ. राजीव पचार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूरे जयपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के लिए निषेधाज्ञा एवं आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश 12 अगस्त 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक अथवा इससे पूर्व निरस्त किए जाने तक प्रभावी रहेगा।

आदेश के तहत रेंट ए कैब स्कीम 1989 के अनुसार पृथक लाइसेंस प्राप्त करने के बाद ही कोई व्यक्ति या फर्म वाहन किराए पर दे सकेगी। लाइसेंस की वैधता पांच वर्ष होगी और अवधि समाप्त होने से पहले उसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।

किराए पर उपलब्ध कराए जाने वाले वाहनों के पास मोटर वाहन अधिनियम की धारा 88(9) के तहत वैध परमिट होना भी जरूरी होगा। इसके अलावा वाहन के सभी दस्तावेज पूरे और फिटनेस संबंधी शर्तें पूरी होना अनिवार्य रहेगा।

इसके अलावा निजी वाहनों यानी प्राइवेट नंबर प्लेट वाले वाहनों को मालिक की व्यक्तिगत जरूरतों के अलावा किराए पर देना अथवा किसी व्यावसायिक गतिविधि में इस्तेमाल करना प्रतिबंधित रहेगा। वाहन किराए पर देने वाली फर्म के पास कम से कम एक 24 घंटे चालू रहने वाला टेलीफोन नंबर भी होना अनिवार्य किया गया है।

पुलिस के निर्देशों के अनुसार वाहन किराए पर लेने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, स्थायी पता और वैध पहचान पत्र की प्रति लेना जरूरी होगा। पहचान पत्र की प्रति को मूल दस्तावेज से मिलान कर सत्यापित करने के बाद ही वाहन सौंपा जा सकेगा।

गाड़ी में यात्रा करने वाले अन्य सभी सह-यात्रियों का भी पूरा विवरण और पहचान पत्र का रिकॉर्ड रखना होगा। फर्म को इसके लिए बाकायदा रजिस्टर संधारित करना होगा।

साथ ही रजिस्टर में वाहन का विवरण, किरायेदार का नाम-पता व मोबाइल नंबर, सह-यात्रियों का विवरण, यात्रा की अवधि, यात्रा का उद्देश्य तथा यात्रा के प्रारंभिक और गंतव्य स्थान का उल्लेख करना होगा। यदि किसी ग्राहक की गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं अथवा उसके आपराधिक या अवांछित गतिविधि में शामिल होने का संदेह होता है तो वाहन संचालक को तत्काल नजदीकी थाने या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देनी होगी।

पुलिस की ओर से वाहनों और दस्तावेजों की जांच के दौरान संचालकों को पूरा सहयोग करना होगा। आदेश का उल्लंघन या अवहेलना करने वाले व्यक्ति, कंपनी अथवा संस्था के प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक अभियोग चलाया जाएगा।

पुलिस प्रशासन के अनुसार जयपुर में महानगरीय संस्कृति के विस्तार के साथ किराए पर वाहन उपलब्ध कराने वाले केंद्रों का चलन बढ़ा है। पुलिस के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिनमें बिना लाइसेंस अथवा अनधिकृत एजेंसियों से वाहन लेकर आपराधिक तत्वों द्वारा गंभीर वारदातों और अन्य अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया गया। इसी सुरक्षा जोखिम को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। जनसामान्य, पर्यटकों और लोक-व्यवस्था की सुरक्षा के हित में आदेश एकपक्षीय पारित किया गया है। इसे सभी संबंधित थानों, कलेक्ट्रेट और पुलिस कार्यालयों के नोटिस बोर्ड तथा मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश