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जवाहर कला केंद्र में फोटो प्रदर्शनी 'गौ माता' का शुभारंभ

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जवाहर कला केंद्र में फोटो प्रदर्शनी 'गौ माता' का शुभारंभ


जयपुर, 24 सितंबर (हि.स.)। भारतीय ग्रामीण जीवन, लोकपरंपराओं और पारिवारिक भावनाओं से जुड़ी गौमाता और मनुष्य के आत्मिक रिश्ते को उजागर करती एक नेशनल फोटो प्रदर्शनी का आयोजन गुरुवार को जवाहर कला केंद्र की सुरेख कला दीर्घा में शुरू हुआ। गुजरात ललित कला केंद्र के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में तस्वीरों के माध्यम से गौ-सेवा, ममता और संवेदनाओं के विविध रंगों को बखूबी प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी का औपचारिक शुभारंभ अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता, राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. भवानी शंकर शर्मा, राजस्थान विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट विभाग के डॉ. कमलेश व्यास और पॉलिटेक्निक कॉलेज के एचओडी महेश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि गौमाता प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति और ग्रामीण परिवारों में एक सदस्य की तरह रची-बसी है। गौ-आधारित गतिविधियां हमेशा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का मुख्य आधार रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी को गौमाता और भारतीय संस्कृति के इस अनूठे संबंध को समझने और इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

प्रदर्शनी में प्रदर्शित तस्वीरें दर्शकों को गहरे तक छू रही हैं। इसमें गाय के समय से पहले प्रसव, मां के पीछे दौड़ते नन्हे बछड़े, प्रसव के बाद दूध पिलाती गाय और पशुपालकों द्वारा बछड़ों की बच्चों की तरह देखभाल करने जैसे वात्सल्य से भरे दृश्य उकेरे गए हैं। गुजरात के भरवाड़ समाज की विवाह परंपराओं में गाय की भूमिका, श्रृंगार, विवाह संस्कार और गौदान से जुड़ी तस्वीरें भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

इसके साथ ही प्रदर्शनी में घटते गोचर क्षेत्र, बढ़ते शहरीकरण और सड़कों पर भोजन की तलाश करती गायों के माध्यम से आधुनिक समय की गंभीर चुनौतियों को भी दर्शाया गया है। वहीं, मृत गाय को ले जाते समय मां को एकटक निहारते नन्हे बछड़े की तस्वीर ने दर्शकों को अत्यंत भावुक कर दिया। यह प्रदर्शनी ममता, सेवा, आस्था और बिछड़ने के दर्द को बेहद प्रभावी ढंग से बयां करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश