नगर निगम जयपुर में लंबित फाइलों पर उठे सवाल, हालिया 7 मामलों का त्वरित निस्तारण
जयपुर, 22 मई (हि.स.)। नगर निगम जयपुर की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। निगम में पिछले तीन वर्षों से लंबित करीब 60 से अधिक फाइलें निस्तारण का इंतजार कर रही हैं, जबकि हाल ही में आए सात मामलों का त्वरित निपटारा किए जाने से पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
नगर निगम में लेआउट प्लान कमेटी और लैंड यूज चेंज से संबंधित बैठक आयोजित की गई। बैठक में लंबित फाइलों के निस्तारण पर चर्चा हुई, लेकिन वर्षों से लंबित मामलों की बजाय हाल ही में आए सात आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा कर दिया गया। इनमें से पांच आवेदन करीब तीन माह पहले तथा दो आवेदन लगभग दो माह पूर्व किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार जिन फाइलों का त्वरित निस्तारण किया गया, उनमें तीन मामले एक आईएएस अधिकारी और उनके परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि दो फाइलें चिकित्सकों और दो बड़े बिल्डर समूहों से संबंधित बताई जा रही हैं। इससे निगम प्रशासन पर आम और खास लोगों के मामलों में भेदभाव करने के आरोप लगने लगे हैं।
बैठक में नगर निगम प्रशासक ने लंबित फाइलों का मुद्दा उठाते हुए अधिकारियों से जानकारी भी मांगी। इसके बावजूद वर्षों से अटकी फाइलों को प्राथमिकता नहीं मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आमजन का आरोप है कि जहां मुख्यमंत्री स्तर पर सुशासन और त्वरित समाधान की बात की जा रही है, वहीं निगम स्तर पर आम लोगों की समस्याओं का समाधान लंबित पड़ा हुआ है। बैठक में नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा, अतिरिक्त आयुक्त नरेंद्र बंसल, प्लानिंग डीसी कविता चौधरी, डे-एनयूएलएम डीसी श्याम जांगिड़, एसीई एस.के. वर्मा, एसीटीपी राजेश शर्मा तथा डीटीपी राजेंद्र गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इस मामले में नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में मैं कोई बात नहीं करूंगा, आप जनसंपर्क अधिकारी से बात कर लें।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

