'भारत के नारी रत्न' पुस्तक में पन्नाधाय को खीची राजपूत बताने पर गुर्जर समाज नाराज
उदयपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। मेवाड़ के इतिहास में अपने पुत्र का बलिदान देकर राजवंश की रक्षा करने वाली पन्नाधाय की जातीय पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गुर्जर समाज ने भारत सरकार के प्रकाशन विभाग की ओर से प्रकाशित पुस्तक 'भारत के नारी रत्न' में पन्नाधाय को 'खीची राजपूत वंश की क्षत्राणी' बताए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। समाज ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ बताते हुए पुस्तक में तत्काल संशोधन की मांग की है।
गुर्जर समाज सेवा समिति, उदयपुर के बैनर तले शुक्रवार को समाज के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल से मिलने पहुंचा। कलेक्टर की अनुपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम (गिर्वा) अवुल साईकृष्णा को ज्ञापन सौंपा। समिति के अध्यक्ष नारायणलाल गुर्जर ने कहा कि वर्ष 2022 में प्रकाशित पुस्तक के आठवें संस्करण के पेज संख्या 8 पर पन्नाधाय की मूल ऐतिहासिक पहचान बदल दी गई है। उनका कहना है कि यह न केवल पन्नाधाय के महान बलिदान का अपमान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सामने गलत इतिहास प्रस्तुत करने का प्रयास भी है।
ज्ञापन के साथ समाज की ओर से कई ऐतिहासिक संदर्भ और प्रमाण भी प्रस्तुत किए गए। समाज की प्रतिनिधि कामिनी गुर्जर एवं अन्य पदाधिकारियों ने दावा किया कि राजसमंद के कमेरी स्थित पन्ना धाय पैनोरमा, चित्तौड़गढ़ के पाण्डोली स्थित पन्ना धाय पैनोरमा तथा उदयपुर के गोवर्धन विलास स्थित पन्ना धाय दीर्घा और प्रतिमा स्थल पर राजस्थान सरकार द्वारा पन्नाधाय का प्रामाणिक इतिहास अंकित किया गया है। इसके अलावा उदयलाल धाभाई के ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए भी पुस्तक में संशोधन की मांग की गई।
समिति के संरक्षक देवनारायण धाभाई ने बताया कि समाज के हेमंत धाभाई और रवि धाभाई जब 'भारत के नारी रत्न' पुस्तक पढ़ रहे थे, तब पन्नाधाय को खीची राजपूत बताए जाने की जानकारी सामने आई। उन्होंने दावा किया कि महाराणा उदयसिंह से लेकर महाराणा भूपाल सिंह तक सभी की धाय माताएं गुर्जर समाज से थीं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उपाध्यक्ष हरीश धायभाई, कोषाध्यक्ष रामचंद्र धाभाई, संरक्षक देवनारायण धायभाई सहित समाज के अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे। समाज ने चेतावनी दी कि यदि भारत सरकार और प्रकाशन विभाग ने प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर पुस्तक में संशोधन नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पन्नाधाय मेवाड़ के इतिहास की वह वीरांगना हैं जिन्होंने बनवीर से राजकुमार उदयसिंह की रक्षा के लिए अपने पुत्र चंदन का बलिदान दे दिया था। उनके इस त्याग को मेवाड़ के इतिहास में अद्वितीय माना जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

