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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में दिया चरक संहिता के शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ने पर जोर

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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में दिया चरक संहिता के शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ने पर जोर


जयपुर, 20 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर में संहिता एवं मौलिक सिद्धान्त विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय महर्षि चरक जयंती-2026 समारोह का बुधवार को समापन हुआ। 17 से 19 अगस्त तक चले समारोह में महर्षि चरक के आयुर्वेद में योगदान, चरक संहिता के मौलिक सिद्धांतों और वर्तमान स्वास्थ्य परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

समारोह में आयुर्वेद विद्वान प्रो. वैद्य बनवारी लाल गौड़, संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. पी. हेमन्ता, प्रो. निशा गुप्ता, प्रो. असित पांजा, प्रो. शैलजा, डॉ. विद्याधीश काशीकर, डॉ. अभिजीत कुंभार, डॉ. प्रवीण कुमार बी, डॉ. अंकित भारद्वाज और अनिल शर्मा सहित विशेषज्ञों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संरक्षण, रोग निवारण और प्रभावी उपचार में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा की।

कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि महर्षि चरक की वैज्ञानिक और तर्कसंगत चिकित्सा दृष्टि आज भी प्रासंगिक है। शास्त्रीय आयुर्वेद ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण से जोड़कर आयुर्वेद की वैश्विक संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने युवा शोधार्थियों को इस दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

विभागाध्यक्ष प्रो. निशा गुप्ता ने कहा कि चरक संहिता के सिद्धांत चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य संरक्षण और रोग निवारण में आज भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देते हैं। समारोह में शलाका, निबंध लेखन, पोस्टर मेकिंग और व्याख्यान श्रृंखला जैसी अकादमिक प्रतियोगिताएं भी हुईं। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश