स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में आईआईटी जोधपुर की नई पहल
जोधपुर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के शोधकर्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और सिमुलेशन तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। संस्थान की मेडिकल एआई सिस्टम्स लैब में ऐसी तकनीकें विकसित की जा रही हैं, जो हृदय की अल्ट्रासाउंड जांच में सहायता करने, मेडिकल स्कैन के विश्लेषण को सरल बनाने और चिकित्सा विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती हैं।
कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक मिश्रा के नेतृत्व में संचालित इस शोध के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित रोबोटिक अल्ट्रासाउंड प्रणाली, मेडिकल स्कैन का कंप्यूटर आधारित विश्लेषण और सिमुलेशन के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा को अधिक संवादात्मक बनाना शामिल है।
हृदय की अल्ट्रासाउंड जांच यानी इकोकार्डियोग्राफी में स्पष्ट और उपयोगी तस्वीरें प्राप्त करने के लिए अल्ट्रासाउंड उपकरण को सही स्थिति में रखना आवश्यक होता है। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष कौशल और अनुभव की जरूरत होती है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित रोबोटिक अल्ट्रासाउंड प्रणाली विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
वहीं आईआईटी जोधपुर की शोध टीम सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड सहित विभिन्न प्रकार की चिकित्सकीय तस्वीरों के विश्लेषण के लिए कंप्यूटर आधारित विधियां भी विकसित कर रही है। शोध का एक प्रमुख क्षेत्र पसलियों में फ्रैक्चर की पहचान और उसका विश्लेषण करना है। इसके लिए शोधकर्ता ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली पर काम कर रहे हैं, जो पसलियों में विभिन्न प्रकार के फ्रैक्चर की स्थिति पहचानने और उनकी विशेषताओं का विश्लेषण करने में सहायता कर सके।
शोध का तीसरा प्रमुख क्षेत्र चिकित्सा शिक्षा है। मेडिकल विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को जटिल चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को समझने तथा व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। हालांकि, वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों में प्रत्येक प्रक्रिया को बार-बार देखने और उसका अभ्यास करने के अवसर हमेशा उपलब्ध नहीं हो पाते। इस दिशा में शोध टीम चिकित्सकीय जांच की प्रक्रियाओं के सिमुलेटर तथा शल्य चिकित्सा से संबंधित वीडियो के निर्माण और विश्लेषण के लिए संवादात्मक उपकरण विकसित कर रही है। इनके माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न परिस्थितियों को समझ सकेंगे और यह जान सकेंगे कि किसी प्रक्रिया में बदलाव करने से उसके अलग-अलग चरणों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
डॉ. दीपक मिश्रा के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवाओं में सार्थक बदलाव ला सकती है, बशर्ते तकनीकों का विकास चिकित्सकों, मरीजों और चिकित्सा विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और कंप्यूटिंग तकनीकों को एक साथ जोडक़र हृदय की अल्ट्रासाउंड तस्वीरें प्राप्त करने, मेडिकल स्कैन के विश्लेषण और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के सिमुलेशन जैसी चुनौतियों पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य ऐसी तकनीकें विकसित करना है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के कार्य में सहयोग दें, चिकित्सा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाएं और भविष्य के स्वास्थ्यकर्मियों को सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

