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राष्ट्रबोध के बिना सशक्त भारत की परिकल्पना अधूरी: हनुमंत राव

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राष्ट्रबोध के बिना सशक्त भारत की परिकल्पना अधूरी: हनुमंत राव


जोधपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। मेरा राष्ट्र, मेरा स्वाभिमान, आत्मगौरव, मातृभाषा, मातृभूमि और माता का प्रेम सर्वोपरि है- इसी राष्ट्रचेतना और स्वामी विवेकानंद के जीवन-दर्शन से अनुप्राणित विचारों के साथ जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद का राष्ट्र बोध और एकात्म भारत विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर डायलॉग तथा विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हनुमंत राव ने स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रबोध, आत्मगौरव तथा अखंड भारत की संकल्पना पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि परतंत्र भारत के दौर में जब ब्रिटिश शिक्षा और विचार भारतीय आत्मविश्वास को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे, तब एक विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न युवा नरेंद्र, जो आगे चलकर रामकृष्ण परमहंस से आध्यात्मिक दीक्षा प्राप्त कर स्वामी विवेकानंद बने। उन्होंने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान को विश्व पटल पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की।

उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने भारत को केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकात्मता का जीवंत राष्ट्र माना तथा युवाओं को आत्मबल, मनोबल, शारीरिक सामथ्र्य और चरित्रबल के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) राजस्थान के प्रांत महामंत्री प्रो. रिछपाल सिंह ने की।

विशिष्ट अतिथि के रूप में विवेकानंद केंद्र के हिंदी प्रकाशन विभाग प्रमुख अशोक माथुर उपस्थित रहे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ की निदेशक डॉ. विजयश्री ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया, जबकि विषय प्रवर्तन जोधपुर डायलॉग के समन्वयक प्रो. रामसिंह आढा ने किया। कार्यक्रम का संचालन थिएटर सेल के निदेशक डॉ. हितेंद्र गोयल ने किया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव दशरथ कुमार सोलंकी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश