अब इंडिया की जगह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पर जोर- डॉ वोहरा
कोटा, 09 मई (हि.स.)। मेड इन भारत के एम्बेसेडर व छह देशों में राजदूत रहे डॉ.दीपक वोहरा ने कहा कि अब इंडिया के स्थान पर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा पर तेजी से काम हो रहा है। वाेहरा कोटा विश्वविद्यालय एवं दिवाथर्व विकास फाउंडेशन द्वारा अपने भीतर छिपी आंतरिक शक्ति को पहचाने के लिये जामवंत सीरिज पर आयोजित नेशनल सेमिनार में मुख्य वक्ता के ताैर पर संबाेधित कर रहे थे।
वोहरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्च में केंद्र सरकार प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढने के लिये दूरगामी कूटनीति के साथ परिवर्तन कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के बडे देशों में आंख से आंख मिलाकर बात करते हैं। हमें विश्वास है कि विकसित भारत का सपना 2030 में ही पूरा होता दिखाई देगा। पूर्वोत्तर राज्यों में अब सभी जय हिंद बोलने लगे हैं। महासागर में 50 प्रतिशत क्रूज उत्तर पश्चिम से हैं।
उन्होंने बताया कि देश में 34 किलाेमीटर सडकें रोज बन रही है,100 घंटे में 100 किलाेमीटर एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ है। 12 किलाेमीटर रेलवे लाइन रोज बन रही है। मेड इन इंडिया के तहत हाइड्रोजन रेल इसी वर्ष चालू होने की उम्मीद है। 98 प्रतिशत एपल फोन भारत में बनने लगे हैं। डिजिटल भारत में प्रति सेकंड 6600 डिजिटल लेनदेन हो रही है। सर्विस सेक्टर व लॉजिस्टिक हमारी ताकत है। हम पर्वों पर शास्त्रों की पूजा करते हैं लेकिन विश्वकर्मा दिवस पर शस्त्रों की पूजा भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का पुराना मानचित्र गोल था, जिसमें भारतीय संस्कृति व परंपराओं को दर्शाया गया था लेकिन 1948 से 1950 के दौरान देश के नक्शे को उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिशाओं में बांटकर दिखाया गया। भारत को कमजोर, गुलाम, गरीब व जातियों में टूटा हुआ देश बताकर कहा गया कि यह कभी अमीर या विकसित नहीं बन सकेगा। यहां के लोकतांत्रिक सिस्टम को तोडने का काम हुआ लेकिन 2014 से 2026 में भारत ने यह साबित कर दिया कि हमारी ताकत कितनी है। भारत न टूटा है, न ही महाशक्तियों के आगे लाचार है।
एक सवाल के जवाब में डॉ. वोहरा ने कहा कि भारत में इस समय 60 हजार कॉलेज व यूनिवर्सिटी हैं। 2 नये कॉलेज रोज खुल रहे हैं। उच्च शिक्षा के बाद देश अब स्टार्टअप केपिटल बन चुका है। दूनिया में सर्वाधिक स्टार्टअप भारत में चल रहे हैं। अब डिग्री से अधिक स्किल डेवलपमेंट पर काम हो रहा है। नई शिक्षा नीति किशोरों एवं युवाओं को भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ओर प्रेरित करेगी। भारत सर्कुलर इकोनॉमी के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारी प्रति व्यक्ति आय पहले से अच्छी है। पहले आय का 70 प्रतिशत रोजमर्रा की चीजों पर खर्च होता था, आज 30 प्रतिशत खर्च होने से जीवन स्तर उंचा हुआ है।
कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.बी.पी.सारस्वत ने कहा कि भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, मजबूती से खडा सक्षम राष्ट्र है। यह अर्पण और तर्पण की भूमि है। जिस तरह हनुमानजी को उनकी भीतरी शक्ति याद दिलाने के लिये जामवंत आगे आये थे, आज शिक्षा संस्थानों के शिक्षक भी जामवंत बनकर अपना कर्तव्य निभायें।
फाउंडेशन की निदेशक अनिता चौहान एवं कोटा विश्वविद्यालय में डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. नीलू चौहान ने बताया कि सेमिनार में ले.कर्नल हिमांशी सिंह, आईएसटीडी देहरादून के चेयरमैन अनूप कुमार, अर्थशास्त्री डॉ गोपाल सिंह, साइक्लोजिस्ट डॉ. सुरभि गोयल, मोदी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ.एन.के.जोशी, आईएसटीडी कोटा के चेयरमैन डॉ अमित सिंह राठौड, दिवाथर्व विकास फाउंडेशन के सलाहकार केबी नंदवाना, समाजसेवी जीडी पटेल ने पैनल सत्रों में उद्बोधन दिये। सेमिनार में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र द्वारा सम्मानित किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द

