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नंदोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब: गोविंद देव जी की शोभायात्रा में झांकियों का आकर्षण

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नंदोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब: गोविंद देव जी की शोभायात्रा में झांकियों का आकर्षण


नंदोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब: गोविंद देव जी की शोभायात्रा में झांकियों का आकर्षण


नंदोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब: गोविंद देव जी की शोभायात्रा में झांकियों का आकर्षण


नंदोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब: गोविंद देव जी की शोभायात्रा में झांकियों का आकर्षण


नंदोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब: गोविंद देव जी की शोभायात्रा में झांकियों का आकर्षण


जयपुर, 05 सितंबर (हि.स.)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन शनिवार को छोटी काशी एक बार फिर कृष्ण भक्ति में डूबी नजर आई। शहर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में नंदोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कहीं बधाई लुटाने की परंपरा ने भक्तों को आनंदित किया तो कहीं भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठे। शाम को आराध्य देव गोविंददेवजी की भव्य शोभायात्रा निकली, जिसमें रिमझिम बारिश के बीच परकोटा हरिनाम संकीर्तन से गूंज उठा।

गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुरजी को केसरिया रंग की नवीन पोशाक धारण कराकर फूलों, आभूषणों और चंदन से मनोरम शृंगार किया गया। धूप झांकी खुलने के बाद वेद मंत्रोच्चार के बीच अधिवास पूजन हुआ और नंदोत्सव की विशेष भोग झांकी के दर्शन कराए गए। इसके बाद मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी की ओर से फल, मिठाइयां, टॉफियां, बिस्किट, खिलौने और अन्य सामग्री की उछाल की गई। श्रद्धालुओं में बधाई लूटने की होड़ मच गई।

मंदिर परिसर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही डटे रहे। महिलाओं ने पारंपरिक भजन गाकर माहौल को और भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए स्वयंसेवक व सुरक्षाकर्मी मुस्तैद रहे।

शाम को मंदिर प्रांगण से ठाकुरजी की शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी और त्रिवेणी पीठाधीश्वर रामरिछपालदास महाराज ने आरती कर यात्रा को रवाना किया। मुख्य द्वार पर काले हनुमान मंदिर के महंत गोपालदास महाराज ने आरती की।

शोभायात्रा में करीब 22 झांकियां, हाथी, ऊंट, घोड़े, बैल का लवाजमा, बैंड और हरिनाम संकीर्तन मंडलियां शामिल हुईं। सबसे आगे सजे-धजे गजराज पर पंचरंगा निशान लिए सेवक चल रहे थे। बैलगाड़ी पर शहनाई वादन हुआ। इसके बाद ऊंट और घोड़ों के काफिले के साथ बैंडवादक भजनों की स्वर लहरियां बिखेरते चल रहे थे।

गणेशजी, तिरुपति बालाजी, श्री अक्रूरजी, राधा-कृष्ण, गोपीनाथजी, श्याम सुंदरजी, राधा दामोदरजी, विनोदीलालजी, राधारमणजी और मदनमोहनजी सहित विभिन्न झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। पिंजरापोल गौशाला की ओर से गौसेवा का संदेश देती झांकी भी शामिल रही। जयपुर बंगाली मंडल सहित विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने हरिनाम संकीर्तन किया।

शोभायात्रा जलेब चौक, हवामहल बाजार, बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार, बापू बाजार, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, चांदपोल बाजार और बगरू वालों के रास्ते होते हुए श्री राधा गोपीनाथजी मंदिर पहुंची। मार्ग में विभिन्न व्यापार मंडलों की ओर से स्वागत मंच बनाए गए। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा, मालवीयनगर विधायक कालीचरण सराफ, सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा, हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य सहित जनप्रतिनिधियों और संत-महंतों ने विभिन्न स्थानों पर मुख्य रथ में विराजित ठाकुरजी की आरती की। श्री राधा गोपीनाथजी मंदिर में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी ने शोभायात्रा की अगवानी कर आरती की।

श्री अमरापुर स्थान पर भी शनिवार शाम ‘गुरु गोविंद के नाम’ नंदोत्सव भक्ति भाव से मनाया गया। संकीर्तन मंडली ने भजन-कीर्तन किए और पुष्पवर्षा के साथ बधाई उत्सव मनाया गया। लड्डू गोपालजी की मनमोहक झांकी सजाई गई तथा माखन-मिश्री का भोग लगाकर विशेष पूजा-अर्चना की गई।

संत मोनू राम ने बताया कि उत्सव के दौरान कपड़े, खिलौने, मिठाई और सूखे मेवों की उछाल की गई। सद्गुरु स्वामी टेऊंराम महाराज द्वारा रचित आध्यात्मिक वाणी और कृष्ण भजनों का संतों ने गुणगान किया। मंदिर में विशेष पुष्प शृंगार किया गया। नन्हे बाल गोपालों की स्वरूप झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

गुप्त वृंदावन धाम में नंदोत्सव के साथ इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद का 130वां व्यास-पूजा महोत्सव भी श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। श्री श्री कृष्ण-बलरामजी का विशेष शृंगार किया गया। भक्तों ने भजन-कीर्तन, नृत्य, पुष्पाभिषेक और झूलन उत्सव में भाग लिया तथा माखन-मिश्री का प्रसाद प्राप्त किया।

सायंकाल व्यास पूजा के दौरान श्रील प्रभुपाद का महा-अभिषेक हुआ। देश-विदेश के भक्तों ने पुष्पांजलि अर्पित की। विभिन्न देशों और भाषाओं के भक्तों की ओर से तैयार ‘व्यास-पूजा अर्पण-पुस्तिका’ समर्पित की गई। इस अवसर पर 1008 व्यंजनों का महाभोग लगाया गया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में पालकी यात्रा, हरिनाम संकीर्तन, गुरु पूजा और महाआरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश