अधिकांश मामलों में देश के कानून का ही पालन कर रहे हैं मुसलमान :सैयद नसरुद्दीन चिश्ती
ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान ने राजस्थान में कॉमन सिविल कोड लागू करने का किया समर्थन
अजमेर, 7 जुलाई(हि.स.)। अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के दीवान और सज्जादानशीन के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने राजस्थान कॉमन सिविल कोड लागू करने का समर्थन किया है।
सैयद नसरुद्दनी चिश्ती ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के अध्यक्ष भी है। यह कौंसिल देश भर की प्रमुख दरगाहों का प्रतिनिधित्व करती है। इस नाते चिश्ती के विचार और सुझाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। चिश्ती ने मीडिया को बताया कि उन्होंने यूसीसी के लिए बनी प्रारूप समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा की उपस्थिति में आयोजित संभाग स्तरीय बैठक में अपना पक्ष व सुझाव रखे हैं। राजस्थान में यूसीसी को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी के सदस्य संभाग मुख्यालय पर जाकर लोगों की राय जान रहे हैं। इसी क्रम में अजमेर में संभाग स्तरीय बैठक हुई।
बैठक में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया का अजमेर दरगाह दीवान के उत्तराधिकारी ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यूसीसी लागू करने से पहले आम लोगों से राय मांगना सराहनीय काम है। प्रदेश के मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि और आम मुसलमान भी अपनी राय दे सकता है। सबसे खास बात यह है कि आम लोगों की राय के आधार पर ही यूसीसी का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बेवजह अल्पसंख्यक समुदाय में भ्रम पैदा कर रहे हैं। आज भी अधिकांश मामलों में मुस्लिम वर्ग देश के कानून का ही पालन करता है। अपराध के मामलों में देश का कानून ही लागू होता है। चिश्ती ने कहा कि बिना निकाह के युवक युवती का लिव इन में रहना इस्लाम में हराम माना गया है। हर मुसलमान कुरान के अनुरूप धार्मिक आचरण करता है। बुराइयों को लेकर कुरान में सख्त हिदायत दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि तलाक, विवाह आदि के पंजीयन को अनिवार्य किया जाता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। तीन तलाक के कानून के बाद मुस्लिम महिला भी भरण पोषण में अब भारतीय कानून पर ही निर्भर है। जहां तक पिता की संपत्ति में बेटी के अधिकार का मामला है तो इसमें इस्लाम में काफी कुछ लिखा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं की राय भी ली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉमन सिविल कोड मुसलमान या हिंदू के लिए नहीं बल्कि राजस्थान के आम नागरिक के लिए है। उन्होंने उम्मीद जताई,राजस्थान में सर्वसम्मति से यूसीसी को लागू किया जाएगा और किसी भी समुदाय की धार्मिक परंपराएं प्रभावित नहीं होगी। यदि आम सहमति से यूसीसी लागू होता है तो हमें कोई एतराज नहीं है।
केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों को लेकर जो कानून बनाया उसका भी दरगाह दीवान की ओर से समर्थन किया गया था। नसरुद्दीन चिश्ती का तब भी कहना रहा कि कानून बनने के बाद वक्फ की संपत्तियों का सही तरीके से संरक्षण होगा। नया कानून बनने के बाद चिश्ती ने सूफी सज्जादानशीन काउंसिल की ओर से केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरण रिजिजू का अभिनंदन भी किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

