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नागौर में विधायक रविंद्र सिंह भाटी की पुलिस-प्रशासन को चेतावनी—‘दादागिरी जेब में रखनी पड़ेगी’

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नागौर में विधायक रविंद्र सिंह भाटी की पुलिस-प्रशासन को चेतावनी—‘दादागिरी जेब में रखनी पड़ेगी’


नागौर, 07 अक्टूबर (हि.स.)। बाडमेर के शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने ईडब्ल्यूएस नियमों में सरलीकरण की मांग को लेकर निकाली जा रही यात्रा के दौरान नागौर में पुलिस और प्रशासन के रवैये पर तीखे तेवर दिखाए। मंगलवार रात पशु मेला मैदान में आयोजित सभा में भाटी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि समय रहते नहीं सुधरे तो दादागिरी जेब में रखनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि वह 50 साल का राजनीतिक मटेरियल हैं और जनता के आशीर्वाद से यहां खड़े हैं।

भाटी ने कहा कि उन्होंने तीन बार छाती ठोककर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जनता के समर्थन से विधानसभा पहुंचे हैं। प्रशासन की ओर से जेल भेजने की चेतावनी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जेलों की कैपेसिटी बढ़ा लेना। उन्होंने यह भी कहा कि वह कभी नहीं चाहेंगे कि प्रशासन के साथ दो-दो हाथ करने की स्थिति बने, लेकिन अधिकारियों को कठपुतली बनकर काम करना बंद करना होगा।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल ढाई साल का है और समय आने पर जनता सबका हिसाब कर देगी। भाटी के इन बयानों के दौरान सभा में समर्थकों ने नारेबाजी की और उनका जोरदार स्वागत किया।

यात्रा के दौरान बुटाटी में प्रशासन की ओर से माइक बंद किए जाने पर भी भाटी नाराज नजर आए। उन्होंने कहा कि माइक बंद करने से आवाज नहीं दबेगी। उनका आरोप था कि सत्ता में बैठे लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर में बैठे लोगों को यह बात खटक रही है कि उनके खिलाफ कोई आवाज कैसे उठा सकता है।

भाटी ने कहा कि जनता पूरी तरह एकजुट है और दबाव बनाने से आंदोलन नहीं रुकेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वह गरीब ब्राह्मण, जैन, विश्नोई और राजपुरोहित युवाओं की समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनके अनुसार हर घर में मुख्यमंत्री बनना जरूरी नहीं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की पीड़ा सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।

विधायक ने पुलिस अधिकारियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कई अधिकारी बंद वातानुकूलित कमरों में बैठकर जनसेवा की बात करते हैं, लेकिन अपनी शपथ भूल जाते हैं। उन्होंने अधिकारियों से नौकरी ज्वाइन करते समय ली गई शपथ को याद करने की अपील की।

भाटी ने कहा कि अधिकारियों को किसी का मान रखना है तो रखें, लेकिन कंधे पर लगे विजय स्तंभ और वर्दी पर अंकित अशोक स्तंभ का मान जरूर रखें। उन्होंने कहा कि आज जो लोग सत्ता की चापलूसी कर रहे हैं, जरूरी नहीं कि ढाई साल बाद भी सत्ता में रहें, लेकिन जनता और युवा यहीं रहेंगे।

भाटी ने कहा कि उन्हें रात में कार्यक्रम करने को लेकर गिरफ्तारी और मुकदमे दर्ज होने की चेतावनियां दी गईं। उन्होंने कहा कि उनके लिए मुकदमे मेडल की तरह हैं और वह मुकदमों के डर से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019 से अब तक वह लगातार संघर्ष करते आए हैं और पहले भी कई मुकदमों तथा जेल का सामना कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यदि अपने साथ खड़े लोगों और युवाओं के लिए जेल जाना पड़ा तो वह उसके लिए भी तैयार हैं।

भाटी की ईडब्ल्यूएस सरलीकरण यात्रा का दूसरा चरण 5 अक्टूबर से शुरू हुआ है। बीकानेर के बाद यात्रा नागौर पहुंची। यात्रा के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाने की मांग उठाई जा रही है। इनमें ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की वैधता, राज्य स्तर पर जारी प्रमाण-पत्रों की केंद्रीय स्तर पर मान्यता और पात्रता संबंधी नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित