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सिजेरियन प्रसव पर भ्रामक दावों से बचें, विशेषज्ञ की सलाह से ही लें निर्णय: आईएमए

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सिजेरियन प्रसव पर भ्रामक दावों से बचें, विशेषज्ञ की सलाह से ही लें निर्णय: आईएमए


जोधपुर, 25 जुलाई (हि.स.)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की जोधपुर शाखा ने सिजेरियन प्रसव को लेकर मीडिया में प्रकाशित भ्रामक एवं वैज्ञानिक तथ्यों से परे दिए गए बयानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आईएमए ने स्पष्ट किया कि सामान्य प्रसव और सिजेरियन, दोनों ही वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत एवं सुरक्षित प्रसव विधियां हैं तथा किस महिला के लिए कौन-सी विधि उपयुक्त होगी, इसका निर्णय केवल प्रशिक्षित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ द्वारा चिकित्सीय परीक्षण के बाद ही किया जाना चाहिए।

आईएमए जोधपुर के अनुसार भ्रूण में ऑक्सीजन की कमी, प्लेसेंटा की असामान्य स्थिति, प्रसव की प्रगति रुक जाना, गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया या एक्लेम्पसिया, भ्रूण की असामान्य स्थिति, पूर्व में गर्भाशय की शल्य चिकित्सा तथा अन्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं में सिजेरियन प्रसव मां और शिशु का जीवन बचाने वाली आवश्यक प्रक्रिया साबित होती है।

ऐसे मामलों में सिजेरियन में देरी करना दोनों के लिए गंभीर और कई बार जानलेवा भी हो सकता है। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि सिजेरियन से जन्म लेने वाले बच्चों की प्रतिरक्षा क्षमता, फेफड़ों के विकास अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर सामान्यीकृत निष्कर्ष वर्तमान वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुरूप नहीं हैं। इन विषयों पर शोध लगातार जारी है और किसी एक मत को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना आमजन में अनावश्यक भय और भ्रम पैदा कर सकता है।

आईएमए जोधपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ राज लोढ़ा, सचिव डॉ. प्रदीप जैन एवं कोषाध्यक्ष डॉ. अमित सिंघवी ने गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से अपील की है कि वे प्रसव संबंधी निर्णय सोशल मीडिया, व्यक्तिगत विचारों या अप्रमाणित दावों के आधार पर नहीं, बल्कि अपने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की सलाह तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुसार ही लें। साथ ही, मीडिया से भी स्वास्थ्य संबंधी समाचारों के प्रकाशन में संतुलित एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा ऐसे भ्रामक शीर्षकों से बचने का आग्रह किया गया है, जो समाज में भ्रम और भय का वातावरण उत्पन्न करें।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश