‘ईश्वर ने इंसान बनाया, जाति हमने बनाई’, रविदास जयंती पर गूंजा समरसता का संदेश
जयपुर, 29 अगस्त (हि.स.)। संत रविदास के 650वें प्राकट्य दिवस पर नीमकाथाना में सामाजिक समरसता, शिक्षा और नशामुक्ति का संदेश गूंजा। हनुमान भक्त मंडल की ओर से अग्रसेन भवन में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में सरकारी स्कूलों के 115 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की सोच से ऊपर उठकर समाज में समानता, भाईचारे और परस्पर सम्मान की भावना मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता घुघाड़ी धाम के संत अवध बिहारी दास महाराज ने की। उन्होंने संत रविदास के जीवन और उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि “ईश्वर ने इंसान बनाया है, जाति हमने बनाई है।” कोई व्यक्ति जन्म से बड़ा नहीं होता, बल्कि उसके कर्म ही उसकी महानता तय करते हैं।
उन्होंने कहा कि जाति-पाति, ऊंच-नीच और भेदभाव की दीवारें समाज की एकता को कमजोर करती हैं, इसलिए इन्हें समाप्त कर भाईचारे और समरसता को बढ़ावा देना जरूरी है।
संत अवध बिहारी दास ने संत रविदास की प्रसिद्ध उक्ति ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल कहावत नहीं, बल्कि व्यक्ति को अपने अंत:करण, आचरण और विचारों को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने युवाओं को समाज और राष्ट्र की शक्ति बताते हुए शिक्षा को अपना हथियार बनाने, मेहनत और संस्कारों के साथ आगे बढ़ने तथा नशे से दूर रहने का आह्वान किया।
समारोह के मुख्य अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विनोद शर्मा तथा मुख्य वक्ता सह प्रांत संघचालक हेमंत सेठिया रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सांवरमर रेगर और बालचंद सिंघीवाल मंचासीन रहे। कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों के 115 मेधावी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों को भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के संस्था प्रधानों, अभिभावकों और पत्रकारों का भी सम्मान किया गया।
मुख्य वक्ता हेमंत सेठिया ने संत रविदास के जीवन, संघर्ष और समानता के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक समरसता ही राष्ट्र की एकता और मजबूती का आधार है। समाज के सभी वर्गों को जाति-पाति और भेदभाव की संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संत रविदास के विचार केवल जयंती समारोहों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवहार और दैनिक जीवन में उतारना होगा। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति दूसरे का सम्मान करेगा और भेदभाव की भावना समाप्त होगी, तभी समरस और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने संत रविदास के चित्र के समक्ष श्रद्धा अर्पित कर उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
आयोजन की खास बात यह रही कि इसे प्लास्टिक मुक्त रखा गया और कार्यक्रम में प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। इस पहल के जरिए आयोजकों ने सामाजिक समरसता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
समारोह में शिक्षा, संस्कार, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को एक साथ जोड़ते हुए युवाओं और समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

