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मातृ मृत्यु के हर मामले की होगी गंभीर समीक्षा, हाई रिस्क गर्भवतियों की विशेष निगरानी: खींवसर

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मातृ मृत्यु के हर मामले की होगी गंभीर समीक्षा, हाई रिस्क गर्भवतियों की विशेष निगरानी: खींवसर


जयपुर, 12 जुलाई (हि.स.)। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक मातृ मृत्यु अत्यंत संवेदनशील विषय है और राज्य सरकार हर मामले की गंभीरता से समीक्षा कर रही है।

उन्होंने अधिकारियों को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी प्रोटोकॉल की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।

खींवसर ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) कम करने की दिशा में लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2022-24 के अनुसार राजस्थान की मातृ मृत्यु दर घटकर 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म रह गई है, जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लगभग 15 अंकों की कमी दर्शाती है। वहीं, संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 94.1 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब चार प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में हाल ही में प्रसूताओं की मौत के मामलों की निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जांच कराई जा रही है। अब तक की जांच में चिकित्सकीय लापरवाही का कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, यदि किसी स्तर पर लापरवाही या प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी पहुंचते हैं, जिन्हें निजी अस्पतालों से गंभीर अथवा जटिल स्थिति में रेफर किया जाता है।

हाई रिस्क गर्भावस्था, अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गंभीर एनीमिया सहित अन्य जटिल मामलों का उपचार सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि सिजेरियन सहित सभी जटिल प्रसव चिकित्सा मानकों और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किए जाते हैं तथा मां और नवजात दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है।

खींवसर ने बताया कि विभाग ने सभी चिकित्सा संस्थानों को हाई रिस्क गर्भवतियों की समय पर पहचान, नियमित मॉनिटरिंग, प्रभावी रेफरल व्यवस्था और विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं। इनकी पालना की लगातार निगरानी की जा रही है। उप स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित मातृ स्वास्थ्य एवं शिशु पोषण दिवस तथा प्रत्येक माह की 9, 18 और 27 तारीख को आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत भी विशेष फोकस किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने हाल ही में जोधपुर और बीकानेर सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की है। निरीक्षण के दौरान चिन्हित कमियों के त्वरित निराकरण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सकीय आधारभूत संरचना के विस्तार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, आधुनिक उपकरणों, आवश्यक दवाओं, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग तथा समयबद्ध रेफरल प्रणाली को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से नियमित प्रसव पूर्व जांच कराने और किसी भी प्रकार की जटिलता होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल से संपर्क करने की अपील की।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित