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राजस्थान में गांव की सरकार चुनने उमड़ा जनसैलाब, कहीं लोकगीतों की गूंज तो कहीं 110 साल की बुजुर्ग ने डाला वोट

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राजस्थान में गांव की सरकार चुनने उमड़ा जनसैलाब, कहीं लोकगीतों की गूंज तो कहीं 110 साल की बुजुर्ग ने डाला वोट


जयपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में गांव की सरकार चुनने के लिए शुक्रवार को लोकतंत्र का उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में प्रदेश की 3,626 ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान हो रहा है। सुबह 7 बजे मतदान शुरू होते ही कई केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लग गईं। कहीं बुजुर्ग लाठी के सहारे वोट डालने पहुंचे, तो कहीं महिलाओं ने लोकगीत और भजन गाकर मतदान के माहौल को उत्सव में बदल दिया।

बारिश और ठंडी हवाओं के बीच भी मतदाताओं का उत्साह कम नहीं हुआ।

प्रदेश में इस चरण के दौरान करीब 1.06 करोड़ मतदाता 3,326 सरपंचों और 33,804 वार्ड पंचों के चुनाव में भाग लेंगे। मतदान के लिए 11,799 केंद्र बनाए गए हैं। शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू होगी और देर रात तक परिणाम सामने आने की संभावना है।

पंचायत चुनाव में बुजुर्ग मतदाताओं का जज्बा भी देखने को मिला। बांसवाड़ा जिले की घाटोल पंचायत समिति के बड़लिया मतदान केंद्र पर 110 वर्षीय वसत देवी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं झालावाड़ जिले की बकानी पंचायत समिति में 102 वर्षीय हसनशाह और 106 वर्षीय कंवरलाल मतदान करने पहुंचे।

झुंझुनूं जिले के नयासर गांव में 100 वर्षीय कुरड़ाराम को परिजन व्हीलचेयर पर बैठाकर मतदान केंद्र तक लेकर आए। इसी जिले की नारी ग्राम पंचायत में 94 वर्षीय माली देवी ने भी वोट डाला। कोटा जिले के अमरपुरा गांव में 81 वर्षीय धापू बाई लाठी के सहारे अपने पोते के साथ मतदान करने पहुंचीं।

झालावाड़ शहर के नजदीक झिरनिया गांव में मतदान केंद्र पर अपनी बारी का इंतजार कर रही महिलाओं ने लोकगीत और भजन गाकर माहौल को उत्सवी बना दिया।

महिलाओं ने गीतों के माध्यम से मतदान के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया। वहीं सीकर जिले की डेरावाली ग्राम पंचायत में सरपंच पद की सभी 12 महिला प्रत्याशी मतदान के दौरान एक साथ बैठी नजर आईं।

अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र की सिलोरा पंचायत समिति के पाटन गांव में भी मतदान को लेकर खास चर्चा है। दो दिन पहले जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में हाईवे के कट पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए पुलिया निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया था। लेकिन शुक्रवार को सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव में ग्रामीण उत्साह के साथ मतदान करने पहुंचे।

मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें देखने को मिलीं।

चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव के बीच अलवर और कोटपूतली-बहरोड़ में बारिश के बावजूद मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे। अलवर के थानागाजी क्षेत्र में लोग छाते लेकर वोट डालने पहुंचे। सीकर के नीमकाथाना क्षेत्र में भी बारिश के बाद ठंडे मौसम के बीच मतदान जारी रहा।

दूसरी ओर, कुछ गांवों में स्थानीय मुद्दों को लेकर नाराजगी भी सामने आई। दौसा जिले के महवा क्षेत्र के करणपुर गांव में परिसीमन के विरोध में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया।

डूंगरपुर जिले की आसपुर पंचायत समिति की उस्मानिया ग्राम पंचायत के एकड़ा फला के ग्रामीणों ने भी गांव को दूसरी ग्राम पंचायत में शामिल किए जाने के विरोध में मतदान से दूरी बनाई।

नागौर जिले की रियांबड़ी पंचायत समिति के बिजाथल मतदान केंद्र पर सरपंच पद के दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच कहासुनी होने की सूचना सामने आई। वहीं नागौर के बीजथल गांव में 89 वर्षीय बुजुर्ग महिला को व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों की मदद से मतदान केंद्र तक पहुंचना पड़ा। झुंझुनूं के भैसावता खुर्द मतदान केंद्र पर भी मतदान के दौरान हंगामे की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित