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सर्वपितृ अमावस्या पर जयपुर में सामूहिक तर्पण-पिंडदान

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सर्वपितृ अमावस्या पर जयपुर में सामूहिक तर्पण-पिंडदान


जयपुर, 29 सितंबर (हि.स.)। ज्ञात-अज्ञात पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गायत्री परिवार की ओर से सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को जयपुर में विभिन्न स्थानों पर सामूहिक तर्पण, पिंडदान और गायत्री यज्ञ आयोजित किए जाएंगे। वहीं गायत्री चेतना केंद्र झोटवाड़ा की ओर से 4 अक्टूबर को भी श्राद्ध तर्पण और पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ होगा।

मुख्य आयोजन दादी का फाटक, मुरलीपुरा स्थित तोंदवाल मैरिज गार्डन में होगा। यहां सुबह 7 से 9 बजे तक तर्पण-पिंडदान और 9 से 10 बजे तक पंचकुंडीय पितृ शांति यज्ञ होगा। आयोजन में शामिल होने के लिए पंजीयन अनिवार्य है। तर्पण कराने वालों को दो तसले घर से लाने होंगे, जबकि तर्पण, पिंडदान और हवन की सामग्री आयोजन स्थल पर उपलब्ध रहेगी।

गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी में भी 10 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से पितरों के निमित्त यज्ञ में विशेष आहुतियां दी जाएंगी। इसी दिन किरण पथ, मानसरोवर स्थित श्री गायत्री वेदना निवारण केंद्र में सुबह 7 बजे से सामूहिक तर्पण एवं गायत्री यज्ञ होगा। यहां व्यवस्था के तहत प्रत्येक परिवार से एक परिजन ही तर्पण कर सकेगा और इसके लिए 9 अक्टूबर तक पंजीयन कराना होगा।

इससे पहले 4 अक्टूबर को झोटवाड़ा की न्यू कॉलोनी सत्यनगर स्थित शहीद मंगेज सिंह पार्क में सुबह 7 से 9 बजे तक श्राद्ध तर्पण और 9 से 11 बजे तक पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ होगा। आयोजन गायत्री शक्तिपीठ कालवाड़ के मार्गदर्शन में होगा। इस दौरान गुरुदेव का साहित्य भी वितरित किया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार पुत्र के अभाव में पत्नी, बहू या अन्य निकट परिजन भी परिस्थितियों के अनुसार श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गरुड़ पुराण में श्राद्ध कर्म के अधिकार और क्रम का उल्लेख मिलता है। निकट संबंधी उपलब्ध नहीं होने पर भाई, भतीजा, भांजा, शिष्य, मित्र या अन्य योग्य व्यक्ति द्वारा भी श्राद्ध किए जाने की परंपरा बताई गई है। हालांकि विधि परिवार की परिस्थिति, संप्रदाय, स्थानीय परंपरा और धर्मशास्त्रीय मत के अनुसार अलग हो सकती है।

धार्मिक परंपराओं में माता सीता द्वारा राजा दशरथ के पिंडदान का प्रसंग भी मिलता है। गया की पौराणिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता गया पहुंचे थे। श्रीराम और लक्ष्मण के श्राद्ध सामग्री लेने जाने के दौरान सीता ने फल्गु नदी, केतकी के फूल और वटवृक्ष को साक्षी मानकर बालू से पिंड बनाकर राजा दशरथ का पिंडदान किया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश