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(अपडेट) ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ जयपुर में निकली लोकमंथन यात्रा

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(अपडेट) ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ जयपुर में निकली लोकमंथन यात्रा


(अपडेट) ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ जयपुर में निकली लोकमंथन यात्रा


-लोक संस्कृति के विविध रंगों से सजा महारानी कॉलेज, 5 हजार से अधिक लोगों ने लिया भाग; 3500 से अधिक विद्यार्थी रहे सहभागी

जयपुर, 21 सितंबर (हि.स.)। ‘लोकमंथन–2026’ के तहत सोमवार को जयपुर में निकली ‘लोकमंथन यात्रा-जयपुर महानगर’ ने शहर की लोक संस्कृति, परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध रंगों को एक मंच पर समेट दिया। गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन के बाद जलेबी चौक से शुरू हुई यात्रा को लोकमंथन–2026 आयोजन समिति की अध्यक्ष एवं राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने यात्रा रथ को रवाना किया।

यात्रा में नागरिकों, प्रबुद्धजनों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।

यात्रा में शाही लवाजमा, लोक वाद्य, पारंपरिक परिधान, अखाड़ों के खिलाड़ी, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और विभिन्न लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। मार्ग में जगह-जगह रंगोलियां सजाई गईं और व्यापार मंडलों तथा समाजजनों की ओर से पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। क्रीड़ा भारती के खिलाड़ियों ने साइकिलिंग, स्केटिंग, फुटबॉल, कबड्डी और सतोलिया जैसी खेल गतिविधियों के प्रदर्शन से यात्रा में उत्साह का रंग भर दिया।

यात्रा में करीब 1500 खिलाड़ी और नागरिक सहभागी रहे।

हवामहल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए यात्रा महारानी कॉलेज पहुंची, जहां लोकमंथन के विभिन्न आयामों पर आधारित कार्यक्रमों में 5 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही। इनमें 3500 से अधिक महाविद्यालयीन विद्यार्थी शामिल रहे। छात्राओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया।

महारानी कॉलेज परिसर में विभिन्न मंचों और प्रदर्शनी स्थलों पर लोक संस्कृति के विविध रूप देखने को मिले। मुख्य सभागार में ‘धरती धोरा री’ नृत्य, चरी, मांड गायन, भवई, कच्छी घोड़ी,

कठपुतली, कालबेलिया और मलखम्ब सहित अनेक प्रस्तुतियां हुईं। संस्कृत लोकगीत एवं लोकनृत्य ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। ‘लोक में भारत’ और ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ विषयों पर व्याख्यान हुए, जबकि ‘स्वतंत्रता समर में राजस्थान के लोक नायक’ पर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई।

लोक आस्था को सामने लाने के लिए बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी से जुड़ी झांकियां तथा मंदिर परंपराओं की प्रस्तुतियां भी की गईं। इनके माध्यम से राजस्थान के लोकनायकों और लोकजीवन में उनकी भूमिका को प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम में लोक जीवन के विभिन्न पक्षों पर संवाद और परिचर्चाओं का भी आयोजन हुआ।

सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, ‘लोक परम्पराएं’ विषय पर लोक संवाद तथा ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी हुई।

खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, जादू कला, लोक कथा, लोक कविता, लोक कहानी और लोक स्मृतियों से जुड़े कार्यक्रम हुए। ‘हम भारत के लोग : संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय’ विषय पर परिचर्चा के साथ इतिहास लेखन की लोक परंपरा और वंशावली वाचन भी प्रस्तुत किया गया।

महारानी कॉलेज में संत रविदास, राजस्थान की वीर-वीरांगनाओं, भारतीय संविधान, गुरुकुल परंपरा, लोक विज्ञान और औषधीय पौधों के वैज्ञानिक महत्व से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई गईं।

साहित्य केंद्र और स्व-चित्र केंद्र भी आकर्षण का हिस्सा रहे।

परंपरागत खेलों के क्षेत्र में कबड्डी, रस्साकशी, महिलाओं के पारंपरिक खेल, तीरंदाजी, थड़ा और साफा प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं लोक व्यंजन क्षेत्र में राजस्थान की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़े व्यंजनों ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।

लोकमंथन यात्रा और महारानी कॉलेज में हुए आयोजनों ने लोक कला, साहित्य, भाषा, आस्था, इतिहास, पारंपरिक खेल, पर्यावरणीय दृष्टि, संविधान और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को एक साथ मंच प्रदान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित