राजस्थान शक्ति, भक्ति, विचार, वीरता, संस्कृति और लोक परंपराओं की धरती : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान शक्ति, भक्ति, विचार, वीरता, संस्कृति और लोक परंपराओं की धरती है। यहां की लोककला, संत परंपरा, साहित्य की विरासत भारत की सांस्कृतिक विविधता दर्शाती है। वर्ष 2016 में उपनिवेशवाद से मुक्ति की थीम के साथ शुरू हुए लोकमंथन के पांचवें संस्करण का राजस्थान में आयोजन होना गर्व की बात है। वहीं, ‘हम भारत के लोग’ की थीम के साथ होने वाले इस आयोजन ने पूरे देश को वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश दिया है।
मुख्यमंत्री बुधवार को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित लोकमंथन-2026 के कर्टन रेजर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकमंथन का उद्देश्य राष्ट्र सर्वाेपरि की भावना से प्रेरित विचारकों, कर्मशील लोगों, लोक कलाकारों, कारीगरों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करना है। इसी क्रम में इस बार लोकमंथन भारतीय सभ्यता के वैश्विक संवाद का माध्यम बन रहा है, क्योंकि विश्वभर में मौजूद भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि भी इस बार भाग ले रहे हैं। जिससे राजस्थान की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को भी विश्व पटल पर नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र प्रथम के संकल्प के साथ राजनीति को राष्ट्र निर्माण का साधन बनाया है। उनके निर्णय, योजना और अभियान के केंद्र में भारत माता, भारत की जनता और भारत का भविष्य रहता है। प्रधानमंत्री ने आर्थिक आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई प्रदान की है। एक भारत श्रेष्ठ भारत, वोकल फॉर लोकल, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के पीछे मूल भाव यही है कि भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति, बौद्धिक क्षमता और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर विश्व का नेतृत्व करे। वहीं, अयोध्या का राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन का महाकाल लोक और सोमनाथ मंदिर आदि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साक्षी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकमंथन की सफलता के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। यह आयोजन राजस्थान को राष्ट्रीय तथा सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान करेगा। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि इस आयोजन को भारत की सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक शक्ति और राष्ट्र प्रथम के संकल्प का महोत्सव बनाया जाए।
केन्द्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि हमारा सांस्कृतिक इतिहास सबसे पुराना है और लोकमंथन भारतीयों को उसी प्राचीन भारत के साथ जोड़ने का मंच है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह आयोजन अतीत का विषय नहीं होकर भविष्य का लक्ष्य प्राप्त करने का साधन है। ‘हम भारत के लोग’ के केवल लोकमंथन के आयोजन का विषय नहीं होकर 140 करोड़ भारतीयों का उद्घोष है।
प्रज्ञा प्रवाह समिति के संयोजक जे. नंद कुमार ने कहा कि लोकमंथन समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाने और प्राचीन भारत के सार्थक मूल्यों पर संवाद का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस मंच पर संवाद का अर्थ जानना और जानकारी देने के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति की अच्छाई और भलाई के लिए कार्य करने का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में राजस्थान सबसे अधिक सांस्कृतिक विविधता वाला राज्य है। 2016 में भोपाल में उपनिवेशवाद से मुक्ति विषय के साथ लोकमंथन की शुरुआत की गई थी। अब राजस्थान जैसे लोक संस्कृति से परिपूर्ण राज्य की राजधानी में पांचवां संस्करण आयोजित होना इसे नए आयाम प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी एवं डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने भी संबोधित किया। साथ ही, लोकमंथन की वेबसाइट का लोकार्पण और प्रज्ञा प्रवाह समिति के संयोजक जे. नंद कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोक से परे लोक’ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश चन्द्र अग्रवाल, पद्मश्री अलगोजा वादक तगाराम भील, ध्रुपद गायिका डॉ. मधु भट्ट तैलंग सहित कई प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर लोकमंथन-2026 के लिए स्वागत समिति का अध्यक्ष मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तथा आयोजन समिति की अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी को घोषित किया गया। कार्यक्रम के दौरान लोकमंथन-2026 की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। साथ ही प्रज्ञा प्रवाह समिति के संयोजक जे. नंद कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोक से परे लोक’ का भी विमोचन किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

