आबकारी नीति के विरोध में शराब ठेकेदारों का धरना: अनिश्चितकालीन आंदोलन की दी चेतावनी
जयपुर, 30 सितंबर (हि.स.)। आबकारी विभाग की नीतियों और बार-बार किए जा रहे बदलावों के विरोध में प्रदेशभर के शराब ठेकेदार बुधवार को लामबंद हो गए। झालाना डूंगरी स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय के बाहर राजस्थान लिकर कॉन्ट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन और राज लिकर वेलफेयर सोसायटी से जुड़े ठेकेदारों ने धरना-प्रदर्शन किया। ठेकेदारों ने गारंटी समायोजन, पेनल्टी में राहत, शराब दुकानों का समय बढ़ाने और बीच सत्र में नीति में बदलाव नहीं करने सहित विभिन्न मांगें उठाईं। राजस्थान लिकर कॉन्ट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पारेता ने कहा कि टेंडर के समय आबकारी विभाग और ठेकेदार के बीच अनुबंध होता है और इसी नीति के आधार पर ठेकेदार नफा-नुकसान का आकलन कर कारोबार शुरू करते हैं। इसके बावजूद दुकानें शुरू होने के बाद विभाग बीच में नए नियम लागू कर देता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 31 मार्च तक एक ही नीति के अनुसार व्यवस्था चलनी चाहिए। हाल में टेट्रा पैक की अनिवार्य खरीद और देसी मदिरा में न्यूनतम 40 प्रतिशत उठाव की बाध्यता जैसे निर्णयों से ठेकेदार परेशान हैं।
पारेता के अनुसार जीएसएम से शराब उठाने की मात्रा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत की गई, जबकि अतिरिक्त माल के समायोजन का आश्वासन दिया गया था। अप्रैल तक समायोजन की बात कही गई, लेकिन अब तक इसका लाभ नहीं मिला। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग को अपनी घोषित नीति पर कायम रहना चाहिए।
राज लिकर वेलफेयर सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष नीलेश मेवाड़ा ने कहा कि लंबे समय से शराब दुकानों का समय बढ़ाकर रात 11 बजे तक करने की मांग की जा रही है। उनके अनुसार पड़ोसी राज्यों में दुकानें रात 10 से 11 बजे तक संचालित होती हैं, जबकि राजस्थान में वर्तमान में रात 8 बजे तक ही अनुमति है। समय बढ़ने से बिक्री और राजस्व दोनों में वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के मार्च में लक्ष्य पूरा करने के बाद ठेकेदारों की ओर से अतिरिक्त शराब के उठाव और बिक्री का समायोजन मौजूदा वित्तीय वर्ष के लक्ष्य में करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक समायोजन नहीं किया गया। इस साल शराब बिक्री के लक्ष्य में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई है, लेकिन दुकान संचालन समय बढ़ाने पर अब तक निर्णय नहीं हुआ है।
ठेकेदारों ने डिपो से पर्याप्त शराब आपूर्ति नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गंगानगर शुगर मिल (जीएसएम) से आने वाली देसी मदिरा की आपूर्ति में कमी से बिक्री प्रभावित हो रही है। साथ ही हाल में 50 यूपी मदिरा की बिक्री को लेकर जारी नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पारेता ने बताया कि उनकी मांग है कि मार्च में उठाई गई अतिरिक्त गारंटी का सभी अनुज्ञाधारियों को पूर्ण समायोजन,अतिरिक्त गारंटी के विरुद्ध उठाई गई अतिरिक्त मदिरा का पूरा समायोजन,टेट्रा पैक की अनिवार्य खरीद/उठाव की बाध्यता समाप्त करना,देसी मदिरा में न्यूनतम 40 प्रतिशत उठाव की अनिवार्यता हटाना,शराब दुकानों का संचालन समय बढ़ाकर रात 11 बजे तक करना,अक्टूबर से देय वार्षिक लाइसेंस फीस (एएलएफ) का लाभ/समायोजन तत्काल देना,देसी मदिरा के लिए जीएसएम की पर्याप्त और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना और 50 यूपी मदिरा की बिक्री संबंधी हालिया नियम वापस लेना प्रमुख है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

