लेपर्ड तीन साल के बच्चे को उठा ले गया, तलाश में पहाड़ी पर मिला लहूलुहान शव; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
सवाई माधोपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे दूमोदा गांव में गुरुवार देर शाम एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। घर के बाहर खेल रहे तीन साल के मासूम दिलखुश बैरवा को लेपर्ड उठाकर जंगल की ओर ले गया। मां ने बेटे को बचाने के लिए लेपर्ड का पीछा किया, लेकिन उसे पकड़ नहीं सकी। इस दौरान वह सदमे में बेहोश हो गई। करीब ढाई घंटे तक तलाश के बाद ग्रामीणों को बच्चा पहाड़ी पर लहूलुहान हालत में मिला। ग्रामीण उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
घटना गुरुवार देर शाम की है।
प्रत्यक्षदर्शी रामकेश गुर्जर के अनुसार, संजय बैरवा का तीन वर्षीय बेटा दिलखुश घर में खेल रहा था। इसी दौरान अचानक लेपर्ड आया और बच्चे को उठाकर जंगल की ओर ले गया। मां ने जब यह दृश्य देखा तो वह बेटे को बचाने के लिए लेपर्ड के पीछे दौड़ी, लेकिन सफल नहीं हो सकी। घटना से वह इतनी सदमे में आ गई कि बेहोश होकर गिर पड़ी। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग की चौकी पर पहुंचकर घटना की सूचना दी। आरोप है कि वनकर्मियों ने कुछ देर में मौके पर पहुंचने की बात कही, लेकिन करीब दो से ढाई घंटे तक कोई टीम नहीं पहुंची। इंतजार के बाद ग्रामीणों ने खुद ही अलग-अलग समूह बनाकर जंगल में बच्चे की तलाश शुरू कर दी। तलाश के दौरान पहाड़ी पर बच्चा गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान हालत में मिला। उसे तुरंत सवाई माधोपुर जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
बच्चे की मौत की खबर मिलते ही जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। दिलखुश चार बहनों का इकलौता भाई था। पिता संजय बैरवा अस्पताल के बाहर बेटे की मौत के गम में फूट-फूटकर रोते रहे। अस्पताल में ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मानटाउन और कोतवाली थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति संभालने का प्रयास किया।
इधर, मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण फलोदी रेंज वन चौकी पहुंच गए और वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए हंगामा किया।
इसी दौरान चौकी के बाहर खड़ी वनकर्मी की बाइक में आग लगा दी गई। सूचना मिलने पर रवांजना डूंगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
हालांकि, घटना को लेकर रणथंभौर टाइगर रिजर्व के डीएफओ मानस सिंह ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि वन विभाग की टीम गांव के बाहर ही मौजूद थी, लेकिन भीड़ वनकर्मियों को नुकसान पहुंचाना चाहती थी। पुलिस टीम के मौके पर पहुंचने के बाद वन विभाग की टीम गांव में गई।
डीएफओ ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में वन विभाग ने अवैध खनन से जुड़े लोगों के ट्रैक्टर पकड़े थे। इसी रंजिश के चलते खनन माफिया के लोग भीड़ में शामिल हो गए और वन रेंज में तोड़फोड़ करते हुए बाइक में आग लगा दी। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस तथा वन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं।
अब ग्रामीण वन विभाग से कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

