तीन दिन बाद पिंजरे में कैद हुआ लेपर्ड
उदयपुर, 04 अप्रैल (हि.स.)। उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र के लोसिंग गांव में पिछले तीन दिनों से फैले लेपर्ड के आतंक का शनिवार सुबह अंत हो गया। वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में लेपर्ड कैद हो गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सुबह जैसे ही लोगों को पता चला कि हमला करने वाला लेपर्ड पकड़ा गया है, मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए और उसे देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।
दरअसल, तीन दिन पहले बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे लोसिंग गांव निवासी 55 वर्षीय किसान तुलसीराम पालीवाल अपने खेत में गेहूं की फसल काट रहे थे। मार्च-अप्रैल की तेज धूप के कारण काम के बाद वे पास ही एक पेड़ की छाया में आराम करने बैठ गए। तभी अचानक झाड़ियों से निकलकर लेपर्ड ने उन पर हमला कर दिया। लेपर्ड ने सीधे उनकी गर्दन पर पंजा मारते हुए झपट्टा मारा।
तुलसीराम कुछ समझ पाते, उससे पहले ही पास के पेड़ पर बैठे बंदरों के झुंड ने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दो-तीन बंदर नीचे कूदकर लेपर्ड की ओर लपके। बंदरों के इस आक्रामक व्यवहार से लेपर्ड का ध्यान भटक गया। उसी समय आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण भी शोर सुनकर मौके की ओर दौड़ पड़े। लोगों की आवाज और बंदरों की हलचल से घबराकर लेपर्ड किसान को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
हमले में तुलसीराम की पीठ और हाथ पर लेपर्ड के पंजों के निशान और खरोंचें आईं। ग्रामीण उन्हें तुरंत लोसिंग के अस्पताल ले गए, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। तुलसीराम ने बताया कि अगर बंदर शोर नहीं मचाते और नीचे नहीं आते तो शायद उनकी जान बचना मुश्किल था।
घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। सूचना मिलने पर वन विभाग ने उसी खेत के पास पिंजरा लगाया। शनिवार अलसुबह लेपर्ड शिकार के लालच में पिंजरे में घुस गया और कैद हो गया। वन अधिकारी लालसिंह ने बताया कि लेपर्ड को उदयपुर ले जाकर मेडिकल जांच के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

