कोटा मंडल में ‘कवच’ से मजबूत हो रही रेल सुरक्षा, यात्रियों को मिलेगी अधिक सुरक्षित यात्रा
कोटा, 26 जुलाई (हि.स.)। भारतीय रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वदेशी तकनीक आधारित ‘कवच’ (पूर्व नाम- ट्रेन कोलिजन अवॉयडेंस सिस्टम) का तेजी से विस्तार कर रही है। आधुनिक कवच 4.0 प्रणाली के लागू होने से कोटा मंडल सहित विभिन्न रेलखंडों पर रेल यात्रा अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीक-सक्षम बन रही है। यह प्रणाली रेल चालक को निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करते हुए सुरक्षित रेल संचालन को और सुदृढ़ बनाती है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने बताया कि कवच भारतीय रेल द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे जुलाई 2020 में राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के रूप में अपनाया गया। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल संचालन की सुरक्षा को मजबूत बनाना तथा असामान्य परिचालन स्थितियों में अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि रेल पटरियों के किनारे लगाए गए विशेष आरएफआईडी टैग, इंजन में स्थापित कवच उपकरण तथा स्टेशन के साथ होने वाला निरंतर रेडियो संचार मिलकर ट्रेन की वास्तविक स्थिति, दिशा, गति, आगे के सिग्नल और अनुमत गति की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। यह प्रणाली पूरे समय ट्रेन की निगरानी करती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः सुरक्षा हस्तक्षेप करती है।
यदि ट्रेन निर्धारित गति सीमा से अधिक गति की ओर बढ़ती है तो कवच पहले चालक को चेतावनी देता है। आवश्यकता पड़ने पर यह स्वतः सामान्य अथवा पूर्ण ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को सुरक्षित सीमा में नियंत्रित कर देता है। इसी प्रकार लाल सिग्नल की स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा हस्तक्षेप आवश्यक होने पर भी यह स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को नियंत्रित करता है।
सौरभ जैन ने बताया कि यदि किसी असामान्य परिचालन स्थिति में दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप आवश्यक हो, तो यह प्रणाली दोनों ट्रेनों के चालकों को तत्काल सचेत करते हुए जरूरत पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाकर संभावित जोखिम को टालने में सहायता करती है। कोहरे अथवा कम दृश्यता की स्थिति में भी चालक को इंजन के केबिन में लगी स्क्रीन पर सिग्नल संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है, जिससे सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होता है। उन्होंने बताया कि कवच प्रणाली 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति के लिए डिजाइन की गई है, जबकि वर्तमान में कवच 4.0 को 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति वाले संचालन के लिए अनुमोदित किया गया है।
कवच प्रणाली में कई आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं। यह मानव रहित समपार फाटक के निकट स्वतः हॉर्न बजा सकती है, ढलान पर ट्रेन के अनियंत्रित खिसकने की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा सकती है तथा किसी ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अप्रत्याशित रूप से रुक जाने पर आवश्यकता अनुसार एसओएस संदेश प्रसारित कर सकती है। इसके अलावा यह ट्रेन की लंबाई का स्वतः आकलन करती है, जिससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने में सहायता मिलती है। नेटवर्क मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) के माध्यम से नियंत्रण कक्ष में अधिकारी कवच युक्त ट्रेनों की वास्तविक समय में निगरानी भी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कवच संभावित जोखिम की स्थिति में स्वतः हस्तक्षेप कर सुरक्षित रेल संचालन में सहायता करता है तथा आमने-सामने या पीछे से होने वाली संभावित टक्कर जैसी दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम करता है। यह प्रणाली विद्युतीकृत और गैर-विद्युतीकृत दोनों प्रकार के रेलखंडों पर कार्य करने में सक्षम है और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद रेल यात्रा का अनुभव प्रदान करती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

