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खाचरियावास ने लगाए वीएलटीडी डिवाइस पर हजार करोड़ की वसूली का आरोप

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खाचरियावास ने लगाए वीएलटीडी डिवाइस पर हजार करोड़ की वसूली का आरोप


जयपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व परिवहन मंत्री एवं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगाने के नाम पर कथित बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा से मामले में जवाब मांगते हुए करीब 800 से 1000 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

खाचरियावास ने कहा कि राजस्थान में 16 लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन हैं। इनमें टैक्सी, छोटे व्यावसायिक वाहन और बड़े मालवाहक वाहन शामिल हैं। उनके अनुसार, पहले जिस उपकरण को करीब 5 हजार रुपये में लगवाया जा सकता था, उसके लिए अब 15 से 17 हजार रुपए तक वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उपकरण की वास्तविक कीमत और वाहन मालिकों से वसूली जा रही राशि में इतना अंतर है, तो अतिरिक्त पैसा कहां जा रहा है।

खाचरियावास ने कहा कि रसीद पर करीब 5,500 रुपये की राशि दर्शाने और वाहन मालिकों से लगभग 15,500 रुपये तक वसूलने की शिकायतें गंभीर हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि निर्धारित शुल्क कितना है, उपकरण की वास्तविक लागत क्या है और अतिरिक्त राशि किस आधार पर ली जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े टेंडर, कंपनियों, डीलरों और शुल्क का विवरण सार्वजनिक करे, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

कांग्रेस नेता ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के ठेकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले भी वाहन मालिकों से निर्धारित राशि से अधिक वसूली किए जाने को लेकर सवाल उठे थे। उस समय लोगों को राहत देने और अतिरिक्त राशि वापस कराने की बात कही गई थी, लेकिन उनके अनुसार वाहन मालिकों को अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वीएलटीडी उपकरण के नाम पर भी वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

खाचरियावास ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी जनता को राहत देना है, न कि नियमों के नाम पर टैक्सी चालकों, छोटे वाहन मालिकों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना। उन्होंने मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से मामले में चुप्पी तोड़ने और सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार का मानना है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है, तो उसे संबंधित दस्तावेज और शुल्क का पूरा विवरण सामने रखना चाहिए। साथ ही, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अनियमितताएं प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश