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यदि आपका कोई गुरु नहीं है तो शास्त्र ही आपका गुरु: प्रो: कौशल

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यदि आपका कोई गुरु नहीं है तो शास्त्र ही आपका गुरु: प्रो: कौशल


अखिल भारतीय साहित्य परिषद का गुरु वंदन कार्यक्रम आयोजित

जोधपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जोधपुर इकाई के तत्वावधान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन में गुरु वंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के विविध आयामों पर विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए गुरु के महत्व को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. (प्रो.) रामवीर सिंह शर्मा ने गुरु-तत्व की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु अनंत हैं और उनकी कथा भी अनंत है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु केवल ज्ञान देने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक, व्यक्तित्व का निर्माता और समाज को दिशा देने वाला प्रकाश-स्तंभ है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. (प्रो.) सरोज कौशल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि आपका कोई गुरु नहीं है तो शास्त्र ही आपका गुरु है।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वेद, उपनिषद, गीता, रामायण और अन्य महान ग्रंथ मानव जीवन के लिए कालजयी मार्गदर्शक हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. (प्रो.) कल्याण सिंह शेखावत ने की। कार्यक्रम के दौरान गुरु-परंपरा, भारतीय संस्कृति और साहित्य की भूमिका पर सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ।

समारोह के अंत में विक्रम सिंह शेखावत ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र बारहठ, डॉ. शैलेन्द्र स्वामी, अजीत सिंह भाटी, जितेंद्र सिंह भाटी, रतन सिंह चम्पावत, चंद्रवीर सिंह समरस, भवानी सिंह खींची सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लक्ष्मण सिंह गड़ा ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश